शांतिपुर की साड़ियों में राजनीति का संगम:

एक ही छत के नीचे खिल रहे 'कमल' और 'घास-फूल

 

अजित प्रसाद,नदिया (शांतिपुर) : पश्चिम बंगाल की राजनीति में भले ही तृणमूल, भाजपा और वामदलों के बीच कांटे की टक्कर हो, लेकिन नदिया जिले के शांतिपुर के तांत (Handloom) कारखानों में तस्वीर बिल्कुल अलग है। यहाँ राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता नहीं, बल्कि एकता और सद्भाव का ताना-बाना बुना जा रहा है। एक ही कारखाने में, एक ही मेज पर कारीगर कंधे से कंधा मिलाकर टीएमसी के ‘जोड़ाफूल’ और भाजपा के ‘पद्म’ (कमल) छाप वाली साड़ियाँ तैयार कर रहे हैं।साल 2026 के विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही शांतिपुर के बुनकरों के पास सांस लेने की फुर्सत नहीं है। राजू दास जैसे कारखाना मालिकों के पास अन्य जिलों से भी हजारों साड़ियों के ऑर्डर आ रहे हैं। इस बार के रुझान कुछ इस प्रकार हैं: पिछले चुनाव के मुकाबले तृणमूल कांग्रेस की साड़ियों की डिमांड सबसे अधिक है। कमल छाप साड़ियों की मांग भी बनी हुई है, जबकि वामपंथी दलों (बाम) के ऑर्डर इस बार थोड़े कम नजर आ रहे हैं।खुशी के इस माहौल के बीच बुनकरों की पेशानी पर बल भी हैं। हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में तनाव और अंतरराष्ट्रीय अस्थिरता के कारण साड़ियों में इस्तेमाल होने वाले रंगों की कीमतें आसमान छू रही हैं। पूरे साल मंदी की मार झेलने वाले इस उद्योग के लिए चुनाव का यह समय किसी ‘मरुद्यान’ (Oasis) से कम नहीं है।राजनीतिक मतभेदों से दूर यहाँ के कारीगरों का मानना है कि उनके लिए पेट की भूख और कला सबसे ऊपर है।”हमारे लिए कोई पार्टी विशेष नहीं है, हमारे लिए सभी रंग बराबर हैं। हम किसी दल के लिए नहीं, बल्कि अपनी आजीविका और कला के लिए काम करते हैं।” — शांतिपुर के एक स्थानीय बुनकर

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