नाबालिग अपहरण कांड में गिरफ्तारी और बरामदगी के बाद भी मोतिहारी टाउन थाना कर रहा आरोपियों को संरक्षित!

 

_विशेष संवाददाता – मोतिहारी पश्चिम चंपारण_
(मामला नाबालिक होने के बाद भी धारा नहीं लगाना,सुपरविजन उद्योग का धंधा साबित होना)_

मोतिहारी। मोतिहारी टाउन थाना कांड संख्या 1175/2025 में नाबालिग बालिका की बरामदगी और मुख्य आरोपी मुन्ना यादव तथा संरक्षण के आरोपी सिकंदर यादव की गिरफ्तारी के बावजूद पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सूत्रों और स्थानीय लोगों का आरोप है कि गिरफ्तारी के बाद भी अभियुक्तों को विधिवत हिरासत में नहीं लिया गया और पूरे मामले को गुप्त रूप से लक्ष्मीनारायण के बल पर मैनेज करने की कोशिश की जा रही है।

नाबालिग बालिका की बरामदगी सुगौली थाना क्षेत्र के करमावा पंचायत अंतर्गत केकड़वा गांव से अभियुक्त के बहनोई के संरक्षण से हुई थी, जहां बार-बार लोकेशन बदलने के कारण गिरफ्तारी टीम को भारी मशक्कत करनी पड़ी, हालांकि इस पूरे ऑपरेशन में अनुसंधानक चंदन कुमार की भूमिका को अहम माना जा रहा है। इसके बावजूद यह बड़ा सवाल बना हुआ है कि इतने संवेदनशील और संगीन नाबालिग अपहरण मामले की पूरी जानकारी समय रहते पुलिस अधीक्षक मोतिहारी को क्यों नहीं दी गई।

स्थानीय चर्चाओं में यह बात आम है कि गिरफ्तारी के बाद अभियुक्तों को थाने में बैठाकर रखने या कागजी कार्रवाई में देरी कर उन्हें संरक्षण देने की कोशिश हुई। मोतिहारी टाउन थाना क्षेत्र के आदर्श थाना परिसर में सीसीटीवी कैमरे लगे होने के बावजूद आरोपी पक्ष से जुड़े दलालों की खुलेआम आवाजाही देखे जाने के दावे किए जा रहे हैं, जिससे यह संदेह गहराता है कि या तो कैमरे खराब हैं या फिर जानबूझकर नजरअंदाज किया जा रहा है।

मामला इसलिए भी बेहद गंभीर है क्योंकि बताया जा रहा है कि नाबालिग बालिका का यह दूसरा अपहरण है; इससे पहले आदापुर थाना क्षेत्र के आंध्रा पकही गांव से उसकी बरामदगी हुई थी, जिसमें उस समय पदस्थापित चौकीदार चंदकिशोर यादव की भूमिका सामने आई थी, जिनका सीडीआर अब संदिग्ध बताया जा रहा है, लेकिन इस बार भी वह जांच के दायरे से बाहर बताए जा रहे हैं क्योंकि उन्हें इस केस का मुख्य मुखबिर माना जा रहा है।

बरामदगी स्थल से लेकर बाजारों तक यह चर्चा जोरों पर रही कि पुलिस मोटी रकम लेकर आरोपी की शादी कराने की तैयारी में है ताकि मामला दबाया जा सके, हालांकि पुलिस की ओर से इस पर कोई स्पष्ट और आधिकारिक खंडन सामने नहीं आया है। पीड़ित परिवार का यह भी आरोप है कि प्रभावशाली अभियुक्त पक्ष के दबाव में उन्हें थाने में मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया, जबकि अगर थाने के सीसीटीवी फुटेज और कॉल डिटेल रिकॉर्ड की निष्पक्ष जांच हो जाए तो कई परतें खुल सकती हैं।

पूरे प्रकरण ने मोतिहारी टाउन थानाध्यक्ष की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं और स्थानीय लोगों की मांग है कि पुलिस अधीक्षक मोतिहारी द्वारा औचक निरीक्षण कराकर इस मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि नाबालिग अपहरण जैसे जघन्य अपराध में पुलिस की कथित उदासीनता और संरक्षण आखिर किसके इशारे पर चल रहा है।

इस कांड के नामजद आरोपी मुन्ना यादव के साथ उसके बहनोई जो कि अप्राथमिक अभियुक्त मानकर पुलिस टीम गिरफ्तार करके थाने लाई जो सीसीटीवी कैमरे में देखा जा सकता है,बाद में उन्हें मोटी रकम लेने के बाद क्या छोड़ दिया गया ?क्या यह कहकर छोड़ दिया गया कि इनका नाम केस में नहीं है ? तो फिर उन्हें पुलिस जीप में बैठाकर लाकर थाने के बाहर ही क्यों नहीं छोड़ दिया गया,जो बाद में उगाही करके छोड़ा जाता है।

इस मामले में मुन्ना यादव को थाने में बैठाकर उसके मां से बात करवाया जाता है कि कल नाटकीय ढंग से लड़की को लेकर आना और सेटिंग के तहत बयान करवाकर मामले को रफा दफा कर दिया जाएगा,इसे कहते है सांप भी मर गया और लाठी भी न टूटा।

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