भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद की 141 वी जयंती पर विनम्र नमन ।
अजित प्रसाद / पटना : भारत रत्न डॉ. राजेंद्र प्रसाद जी की जयंती पर कोटिशः नमन।
बिहार की पावन धरती से उठकर उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में अग्रिम पंक्ति में नेतृत्व किया, संविधान सभा के अध्यक्ष के रूप में देश की नींव को दिशा दी, और स्वतंत्र भारत के प्रथम राष्ट्रपति बनकर राष्ट्र की सेवा का स्वर्णिम अध्याय लिखा।
उनका सरल जीवन, अटूट त्याग, स्पष्ट दृष्टि और राष्ट्रीय एकता के प्रति समर्पण आज भी हम सबके पथ को आलोकित करता है।
*“सफलता उन्हीं को मिलती है जो काम को पूजा बनाकर करते हैं।”* डा राजेंद्र प्रसाद द्वारा कही गई इन बातों को आज उनके 141 वें जयंती पर सदाकत आश्रम में उनकी प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित करते हुए अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सदस्य आनन्द माधव ने कही। राजेन्द्र बाबू को याद करते हुए उन्होने कहा कि देश उनके त्याग और बलिदान को नहीं भूलेगा। श्रधासुमन अर्पित करनें में श्री माधव के साथ नागेंद्र पासवान विकल, वसी अख्तर एवं सुधा मिश्रा आदि थीं।



