दिल्ली में अवैध पार्किंग विकट समस्या

-विभाग को माफिया लगा रहे लाखों का चूना

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विभागों के संज्ञान में चलता है अवैध वसूली का कारोबार
कार्यालय संवाददाता
नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में वाहनों की पार्किंग विकट समस्या बन गई है। स्थानीय निकायों एमसीडी, एनडीएमसी और डीडीए पार्किंग समस्या को लेकर उत्सुक नजर नहीं आते हैं। निकायों ने दिल्ली के जिन जगहों पर पार्किंग घोषित कर ठेका दे रखा है, उसके अतिरिक्त जगहों पर पार्किंग माफियाओं ने अपना कब्जा जमाकर अवैध रुप से लोगों को लाखों रुपए का चूना लगा रहे हैं।
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, निकाय द्वारा निर्धारित जगहों पर पार्किंग की व्यवस्था की गई है जिसका विधिवत टेंडर होता हैै। उन पार्किंग जगहों वाहन चालकों से निर्धारित शुल्क लिया जाता है। उसके अलावा अन्य निःशुल्क जगहों पर दबंग लोगों द्वारा कब्जा कर अवैध पार्किंग चार्ज वसूला जाता है। ऐसा ही एक मामला जनकपुरी डिस्टीक्ट सेंटर के चारों तरफ रोड पर अवैध पार्किंग वसूली का आया है। पार्किंग माफिया विभाग से अधिकृत नहीं होने के बावजूद इन जगहों पर अवैध रुप से पार्किंग चलाते हैैं। निगम का जाली पर्ची भी देते हैं, लेकिन यह पैसा सरकारी खजाने न जाकर स्थानीय विभागों अधिकारियों में बंदरबांट हो जाता है।

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सूत्रों ने बताया कि अवैध पार्किंग में स्थानीय निगम, स्थानीय पुलिस की मिलीभगत होती है। अगर कोई वाहन चालक पार्किंग चार्ज देने से इंकार करता है तो माफिया स्थानीय पुलिस को बुला कर प्रताड़ित करवाता है। दरअसल, पुलिस अवैध वसूली के लिए संरक्षक बन जाती है क्योंकि अवैध वसूली में उसे भी आमदनी होती है। यह अवैध वसूली का खेल संपूर्ण दिल्ली धड़ल्ले से फल-फूल रहा है। डिस्टीक्ट सेंटर के आस पास भीड़भाड़ होने की वजह से पैदल चलने वाले यात्री को बेहद परेशानी उठानी पड़ती है।
कुछ ऐसी ही व्यवस्था आईटीओ स्थित बहादुर शाह जफर मार्ग, प्रेस एरिया में देखने को मिलती है। प्रेस एरिया में प्रशासन द्वारा पार्किंग की कोई समुचित व्यवस्था नहीं है। यहां ऑफिस के सामने ही पार्किंग माफियाओं ने अवैध रुप से चलाते है। वाहनों की विधिवत पर्ची काटी जाती है, लेकिन यह पैसा सरकारी खजाने में जमा न होकर स्थानीय विभागो में बंट जाता है। अवैध पार्किंग की वजह से यहां जाम लगा रहता है। लोगों का चलना मुहाल हो जाता है। ऐसी समस्याओं के संदर्भ में विभाग को शिकायत की जाती है, लेकिन जिनकों जांच करना होता है वही इस अवैध वसूली में शामिल है। पाबंदी लगे तो कैसे। इस तरह के मामले में अपराध शाखा को संज्ञान लेकर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।

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