लम्पी स्किन डिजीज से बचाव हेतु शुरू हुआ लम्पी टीकाकरण अभियान !

जिले में आज से 2 अगस्त तक दो माह चलेगा गांव-गांव टीकाकरण अभियान !

 

गायों को लम्पी से सुरक्षा देने निकली टीमें, गोवंश की रक्षा के लिए सरकार ने कसी कमर !

पशुपालकों को राहत, टीकाकरण से सुरक्षित होगा गोवंश !

कोटपूतली-बहरोड़-
गौवंश को लम्पी स्किन डिजीज जैसी जानलेवा बीमारी से सुरक्षित रखने के लिए प्रदेश सहित जिले भर में ‘लम्पी स्किन डिजीज रोग प्रतिरोधक टीकाकरण अभियान’ का आज से शुरू हो गया है। यह अभियान 2 जून से 2 अगस्त 2025 तक संचालित किया जाएगा, जिसमें गॉट पॉक्स वैक्सीन (उत्तरकाशी स्ट्रेन) का उपयोग कर 4 माह से अधिक उम्र के स्वस्थ गौवंश का टीकाकरण किया जाएगा।

मानसून से पहले पूरी होगी हर्ड इम्युनिटी की तैयारी—-
उपनिदेशक पशुपालन विभाग डॉ. हरीश कुमार गुर्जर ने बताया कि यह टीकाकरण मानसून से पूर्व इसलिए किया जा रहा है ताकि वेक्टर जनित संक्रमणों की गतिविधि बढ़ने से पहले ही पशुओं में रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित की जा सके। इससे समय रहते ‘हर्ड इम्युनिटी’ सुनिश्चित होगी और महामारी पर नियंत्रण पाया जा सकेगा।

जिले में माइक्रो-लेवल प्लानिंग से होगा कार्य—-
जिले की प्रत्येक पशु चिकित्सा संस्था को स्थानीय गोवंश की संख्या के अनुसार टीकाकरण लक्ष्य दिया गया है। अभियान में पशु मित्रों, प्राइवेट वैक्सीनेटर्स तथा मोबाइल वेटनरी यूनिट्स की भी सहायता ली जाएगी। टीकों को वैक्सीन के भंडारण और परिवहन 2 से 8 डिग्री सेल्सियस तापमान पर करते हुए सुनिश्चित किया गया है।

इन क्षेत्रों में शत-प्रतिशत टीकाकरण अनिवार्य—–
पिछले वर्षों में जहां-जहां लम्पी का प्रभाव ज्यादा रहा था उन क्षेत्रों को प्राथमिकता सूची में रखा गया है। गौशालाएं, संरक्षित वन्य क्षेत्र व वनों की परिधि में 5 से 10 किलोमीटर समीप के गांव और जिले से लगते राज्यों के सीमावर्ती इलाके इस अभियान के केंद्र में हैं जहां शत प्रतिशत टीकाकरण अनिवार्य है।

गर्भवती गायों के लिए विशेष सावधानी—-
टीकाकरण के दौरान गर्भवती गायों को विशेष सावधानी से टीका लगाया जाएगा वहीं भैंसों और बीमार, रोग ग्रस्त पशुओं का टीकाकरण नहीं किया जाएगा। यह प्रक्रिया स्वास्थ्य मानकों व वैज्ञानिक विधियों से की जाएगी जिससे बीमारी के फैलाव को रोका जा सके।

विभागीय समन्वय से रोग नियंत्रण की तैयारी—-
उपनिदेशक पशुपालन विभाग हरीश कुमार गुर्जर ने बताया कि संभावित प्रकोप की स्थिति में पंचायतीराज, स्वायत्त शासन एवं वन विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर संवेदनशील क्षेत्रों में आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

2022-23 में 76 हजार गोवंशीय पशुओं की हुई थी मृत्यु—-
गौरतलब है कि वर्ष 2022-23 में लम्पी रोग से प्रदेश में लगभग 76,000 गोवंशीय पशुओं की मौत हुई थी। लेकिन विभागीय प्रयासों के चलते पिछला अभियान 95% टीकाकरण लक्ष्य तक पहुंचा और कई जिलों में समय रहते संक्रमण पर नियंत्रण पाया गया। इस वर्ष राज्यभर में 111.57 लाख गोवंश के टीकाकरण का लक्ष्य मिला है जिसमें गोवंश को बचाने के उद्देश्य से व्यापक रोग प्रतिरोधक सुरक्षा कवच तैयार किया जाएगा।

पशुपालकों से विभागीय अपील—-
पशुपालन विभाग द्वारा जिले के सभी पशुपालकों से अपील की गई है कि वे इस अभियान में सहयोग करें ,अपने पशुओं को समय पर टीका लगवाएं और लम्पी जैसी खतरनाक बीमारी से अपने गोवंश पशुधन को सुरक्षित रखें।

इनका कहना है——

“राज्य सरकार के निर्देश पर पशुपालन विभाग की ओर से लम्पी स्किन डिजीज की रोकथाम हेतु यह विशेष टीकाकरण अभियान शुरू किया गया है। हमारा लक्ष्य है कि मानसून से पहले ही सभी लक्षित व स्वस्थ गौवंशीय पशुओं को टीका लगाया जाए, जिससे पशुओं में हर्ड इम्युनिटी विकसित हो सके। हम चाहते हैं कि पशुपालकों को दोबारा 2022 जैसी स्थिति का सामना न करना पड़े। जिले की प्रत्येक पशु चिकित्सा संस्था को कार्यक्षेत्र अनुसार लक्ष्य दिए गए हैं और टीकाकरण प्रक्रिया को वैज्ञानिक तरीके, शीत श्रृंखला संधारण और सतर्कता के साथ अंजाम दिया जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में पशु मित्रों व मोबाइल यूनिट्स की मदद से हर घर, हर गौवंश तक पहुंचने का प्रयास किया जाएगा।”

डॉ हरीश कुमार गुर्जर—(उपनिदेशक पशुपालन विभाग, जिला कोटपूतली-बहरोड़ )

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