बिहार कांग्रेस में शीर्ष पदों पर बैठे लोगों के कारण 2025 से भी ज्यादा बदतर ना हो जाए 2029 में कांग्रेस की स्थिति – माधव* ।

 

अजित प्रसाद / पटना: हर कांग्रेसी, कांग्रेस पार्टी को एक परिवार के रूप में देखता है। परिवार में रूठनें मनानें का सिलसिला चलता रहता है। लेकिन अगर परिवार में कोई अधिनायकतंत्र चलाना चाहता हो, अपने ईगो के आगे किसी को कुछ नहीं समझता हो तो, परिवार विघटन के कगार पर आ जाता है।
बिहार विधानसभा चुनाव में बिहार कांग्रेस के दुर्गति के बाद हर सच्चा कांग्रेसी दुखी है और दर्द में है। लोगों की नाराजगी जायज है। समय उनके दर्द पर मरहम लगानें के बदले बिहार कांग्रेस के शीर्ष पदों पर बैठे लोग अभी भी सत्ता के मद में चूर हैं। बात करनें की जगह *नोटिस* थमा रहे हैं। लोगों को मनानें की जगह *निष्कासन* कर रहे हैं। जैसे कोई *वैधानिक संकट* आ गया हो। पार्टी को जितना गर्त में जाना था वह तो चला गया। इससे बुरी स्थिति पहले कभी नहीं हुई थी। कहॉं हम सरकार बना रहे थे, कहॉं विपक्ष में भी अपनी गिनती करानें लायक नहीं रहे।
जिम्मेदारी लेने की जगह आपका रवैया पार्टी को समाप्त करनें की है, दूसरे के मत्थे ठीकरा फोडनें की है।
समय है पार्टी को जोड कर रखनें का। हमसब को अभी से 2029 की तैयारी मिलजुलकर करनेा होगा।राहुल जी को प्रधानमंत्री बनानें के लिये फिर से ईंट से ईंट जोडना होगा।देश के करोडों युवाओं और लोगों के सपनें को साकार करनें ही हमारा लक्ष्य है।लेकिन आपका व्यवहार बतलाता है कि, आपनें पार्टी को बिहार में समाप्त करनें का बीडा उठाया है। कहीं ऐसा ना हो कि आप अपनें अहं के कारण बिहार कांग्रेस की स्थिति 2029 में 2025 से भी बदतर कर दें।
बिहार प्रभारी कृष्णा अल्लावरू एवं बिहार प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम समय रहते संभल जाइये, यह मेरी नहीं समय की चेतावनी है।

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