कड़ी सुरक्षा के बीच पश्चिम बंगाल के पहले चरण का मतदान शुरू, लगी है लंबी लंबी कतार

कही से कोई अप्रिय घटना की खबर नहीं, सभी प्रत्याशी मतदान से खुश

 

अजित प्रसाद / सिलीगुड़ी: पश्चिम बंगाल में पहले चरण के तहत 16 जिलों की 152 सीटों पर वोट डाले जा रहे हैं। ज्यादातर मतदान केंद्रों पर लंबी लंबी कतारें लगी हुई है। सत्ता पक्ष के सिलीगुड़ी उम्मीदवार गौतम देव बाहरी मतदाताओं को लेकर अपनी नाराजगी जताई है।

डाबग्राम फूलबाड़ी के माकपा प्रत्याशी दिलीप सिंह भी अबतक के चुनाव को लेकर संतुष्ट है।इस चरण में कुल 1,478 उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं, जो अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। निर्वाचन आयोग के मुताबिक, इस चरण में 3.60 करोड़ से अधिक मतदाता मतदान के पात्र हैं। इनमें लगभग 1.84 करोड़ पुरुष, 1.75 करोड़ महिलाएं और 465 तृतीय लिंग के मतदाता शामिल हैं।

पश्चिम बंगाल में पहले चरण के तहत 294 में से 152 सीटों पर वोट डाले जा रहे हैं, जबकि तमिलनाडु में सभी 234 सीटों पर एक ही दिन में मतदान हो रहा है. दोनों राज्यों में बड़ी संख्या में मतदाता मतदान केंद्रों तक पहुंच रहे हैं, जिससे भारी मतदान की उम्मीद जताई जा रही है। बंगाल में हाई-वोल्टेज मुकाबला: पश्चिम बंगाल में सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बीच सीधी और कड़ी टक्कर देखने को मिल रही है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व में टीएमसी जहां अपनी सत्ता बरकरार रखने की कोशिश कर रही है, वहीं भाजपा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में आक्रामक चुनाव प्रचार किया है।भाजपा ने राष्ट्रवाद, हिंदुत्व, भ्रष्टाचार के आरोप, बांग्लादेश से अवैध घुसपैठ और शासन से जुड़े मुद्दों को अपने अभियान का केंद्र बनाया है। मतदाता सूची विवाद पर राजनीति: राज्य में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर भी सियासत गरमाई हुई है. टीएमसी ने भाजपा पर भारतीय चुनाव आयोग के साथ मिलीभगत का आरोप लगाया है और इस मुद्दे को अदालत तक पहुंचाया है। बताया जा रहा है कि मतदाता सूची से 91 लाख से अधिक नाम हटाए गए हैं, जबकि करीब 62 लाख मतदाताओं की स्थिति अभी भी अनिश्चित बनी हुई है, जिससे यह मुद्दा चुनावी बहस का बड़ा केंद्र बन गया है। कल्याणकारी योजनाएं और बंगाली पहचान: टीएमसी अपने चुनाव अभियान में ‘लक्ष्मी भंडार’ जैसी योजनाओं को प्रमुखता दे रही है. इसके साथ ही पार्टी ने बंगाली पहचान को भी चुनावी मुद्दा बनाया है और खुद को राज्य की सांस्कृतिक विरासत का संरक्षक बताने की कोशिश की है।

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