फुलेश्वरी के बाद अब महावीरस्थान रेलवे गेट बंद होने की आशंका! विधायक शंकर घोष ने मछली कारोबारियों को दिया आश्वासन और फुटपाथ कब्जा करने वालों को दी कड़ी चेतावनी
सिलीगुड़ी: पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में फुलेश्वरी रेलवे गेट बंद होने के बाद अब शहर के महत्वपूर्ण इलाके महावीरस्थान के दोनों रेलवे गेट भी बंद किए जाने की आशंका से व्यापारियों में गहरी चिंता फैल गई है। इस बीच, शुक्रवार सुबह सिليगुड़ी के विधायक और मंत्री शंकर घोष ने खुद महावीरस्थान पहुंचकर इलाके का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने रेलवे गेट के मुद्दे के साथ-साथ मछली व्यापारियों की समस्याओं और अवैध रूप से फुटपाथ परब् कब्जा करने वालों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया।
रेलवे गेट बंद होने की अटकलें और व्यापारियों की चिंता
महावीरस्थान में रेलवे गेट बंद किए जाने की चर्चाओं के चलते राजनीतिक सरगर्मी और व्यापारिक चिंताएं बढ़ गई हैं। इस संबंध में बात करते हुए विधायक शंकर घोष ने कहा कि अंडरपाउस या रेल ब्रिज वाले क्षेत्रों में रेलवे गेट न रखने की नीति रेलवे की अखिल भारतीय नीति (All India Policy) के तहत है। हालांकि, उन्होंने स्थानीय व्यापारियों को आश्वस्त किया कि वे इस मामले में रेलवे अधिकारियों, जिला प्रशासन, नगर निगम और पुलिस कमिश्नरेट के साथ उच्चस्तरीय चर्चा करेंगे और व्यापारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए कोई ठोस समाधान निकालने का प्रयास करेंगे।
मछली व्यापारियों को मिला अधूरा काम जल्द पूरा होने का आश्वासन
दौरे के दौरान महावीरस्थान में उत्तर बंगाल विकास विभाग द्वारा शुरू किए गए एक विकास कार्य के लंबे समय से अधूरा पड़े होने का मुद्दा मछली व्यापारियों ने उनके सामने उठाया। इस काम से कई व्यापारियों की आजीविका जुड़ी हुई है। मौके पर मौजूद नगर निगम के अधिकारियों के साथ स्थिति का जायजा लेते हुए मंत्री ने जल्द से जल्द इस अधूरे काम को पूरा करवाने का आश्वासन दिया।
फुटपाथ पर अवैध कब्जा करने वालों को सख्त चेतावनी
शहर में अतिक्रमण के मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाते हुए विधायक शंकर घोष ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी कि सड़कों और फुटपाथों पर दुकानें लगाकर आम नागरिकों के चलने में बाधा पैदा करना अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
एक तरफ रेलवे गेट बंद होने की आशंका से जूझ रहे व्यापारियों को राहत दिलाने की बात, दूसरी तरफ अटके हुए विकास कार्यों को गति देने का वादा और अतिक्रमण पर सख्त संदेश—इन तमाम मुद्दों के बीच अब यह देखना दिलचस्प होगा कि प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की इस पहल से महावीरस्थान के व्यापारियों की समस्याओं का कितना समाधान निकल पाता है।




