पंजाब के फगवाड़ा में कवि अनिकेत के सद्य: प्रकाशित कविता संग्रह का विमोचन।
साहित्य संसार पुस्तक लोकार्पण समारोह
राजीव कुमार झा
“कवि एवं कविता को अपनी भूमिका तलाशनी होगी। जहाँ भी हैं स्पष्ट रहना होगा। स्त्री-पुरुष के विभेद को कम करके देखना होगा। विनोद अनिकेत शांत मन के कवि हैं। दार्शनिक विचारों, राजनीति, समाज और आर्थिक विसंगतियों को उजागर करता यह संग्रह हमें वर्तमान हिन्दी कविता लेखन के प्रति आश्वस्त करता है।”
यह कहना था कवि एवं आचार्य अशोक कुमार का जो बिम्ब-प्रतिबिम्ब प्रकाशन द्वारा प्रकाशित एवं बरनाला के कवि विनोद अनिकेत द्वारा रचित कविता संग्रह ‘अँधेरे दिनों में’ के लोकार्पण कार्यक्रम में सत्र-अध्यक्ष की भूमिका का निर्वहन कर रहे थे। यह कार्यक्रम दो सत्रों में था। पहले सत्र में पुस्तक केन्द्रित चर्चा-परिचर्चा हुई जिसमें श्री सिमर सदोष, डॉ. अजय शर्मा जी, कथाकार श्री पवन , डॉ. बृजेन्द्र अग्निहोत्री, श्री दिलीप कुमार पाण्डेय आदि ने चर्चा-परिचर्चा की।
दूसरा सत्र कविता दरबार के नाम रहा जिसकी अध्यक्षता वरिष्ठ कवि एवं आलोचक तरसेम गुजराल जी ने की जिसमें उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जब हर चीजें राजनीति निर्धारित कर रही हैं तो रचनाकारों को किसी भी रूप में राजनीति में तटस्थता की भूमिका में नहीं होना चाहिए। इस सत्र में डॉ. सरला भारद्वाज, मनोज फगवाड़वी, नीरू ग्रोवर, माला अग्रवाल माधवी, सपना, राधा रानी, श्रेया एवं देवेश पाण्डेय ने अपनी कविताओं का पाठ किया | स्वागत पंजाबी भाषा के कवि एवं कथाकार रवीन्द्र चोट ने की। धन्यवाद ज्ञापन डॉ. यश चोपड़ा द्वारा किया गया ।
इस अवसर पर पंजाबी विरसा ट्रस्ट, फगवाड़ा द्वारा सभी साहित्यकारों को उनके योगदान के लिए सम्मानित भी किया गया। प्रिंसिपल डॉ. गुरमीत सिंह पलाही द्वारा साहित्यकारों की चिंता और वर्तमान हालात पर विस्तार से प्रकाश भी डाला गया। कार्यक्रम का संचालन अनुवादक और कवयित्री रूपिंदर कौर द्वारा किया गया।
इसके पहले कवि विनोद अनिकेत ने अपनी रचनाधर्मिता और वैचारिक सरोकारों को लेकर प्रकाश डाला। पारिवेशिक जड़ताओं के खिलाफ वैचारिक संघर्ष इनके लेखकीय जीवन का आधार रहा। पंजाब में अक्सर मौन रहकर कार्य करने में निमग्न रहने वाले कवि अनिकेत अपनी पत्नी को वह आधार बताया जिनके संग-साथ से ही कवि-रूप में उनका सक्रिय रहना संभव हो सका । इस अवसर पर शहर और उसके बाहर से भी कवि डॉ. बलवेन्द्र सिंह, सम्पादक राकेश शांतिदूत, अरविन्द पाण्डेय, शोधार्थी नेहा, आरती, प्रीति आदि साहित्य प्रेमियों की उपस्थिति रही।



