शेख हसीना की हुंकार बांग्लादेश में लोकतंत्र करो बहाल हम वापस लौटेंगे

कट्टरवादियों को लेकर सीमांत क्षेत्रों में मुश्किल में है लोग

 

अजित प्रसाद : बांग्लादेश अब खुद को पाकिस्तान के रास्ते पर ले जाने में लगा है. यहां आयोजित एक बड़े धार्मिक कार्यक्रम में पाकिस्तान के दो मौलानाओं ने बांग्लादेश पर खुलकर दबाव बनाने की कोशिश की। उन्होंने ऐसी मांग की है जो बांग्लादेश में रहने वाले हिंदुओं की मुश्किल बढ़ा सकता है।विवाद तब बढ़ा जब पाकिस्तान की नेशनल असेंबली के सदस्य और जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम पाकिस्तान के अध्यक्ष मौलाना फजलुर रहमान और अहले सुन्नत वल जमात के वरिष्ठ नेता मौलाना औरंगजेब फारूकी ने सभा को संबोधित किया. दोनों ने बांग्लादेशी मुस्लिमों को अपना भाई बताया और जोर देकर कहा कि बांग्लादेश को पाकिस्तान की तरह ईशनिंदा कानून लागू करना चाहिए। साथ ही उन्होंने बांग्लादेश के धर्मगुरुओं से अहमदिया समुदाय को गैर-मुस्लिम घोषित करने के लिए दबाव बनाने की अपील की। अपने संबोधन में दोनों नेताओं ने ‘काबुल से बांग्लादेश तक एक कलिमा’ जैसे नारे भी लगाए। इस बीच बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना पिछले साल हिंसा के बाद भारत आ गई थीं, जिसके बाद से ही वह राजधनी दिल्ली में एक अज्ञात स्थान पर रह रही हैं। इस बीच, बांग्लादेश में अगले साल की शुरुआत में आम चुनावों का ऐलान किया गया है। हालांकि, हसीना की अवामी लीग पार्टी को बैन कर दिया गया है। मीडिया से बात करते हुए शेख हसीना ने कहा है कि अवामी लीग को छोड़कर किसी भी चुनाव को वैध नहीं माना जा सकता। उन्होंने एक तरह से शर्त रखी कि उनके बांग्लादेश लौटने के लिए पहले स्वतंत्र, निष्पक्ष चुनाव करवाकर लोकतंत्र को बहाल करना होगा।
उन्होंने बांग्लादेश में अगले साल होने वाले चुनाव पर कहा कि ये इलेक्शन एक अनिर्वाचित सरकार द्वारा गढ़े गए एक असंवैधानिक चार्टर के तहत करवाए जा रहे हैं। इसी सरकार ने यह शर्त रखी है कि नौ बार निर्चावित होने वाली पार्टी चुनाव नहीं लड़ सकती है। इसी वजह से लाखों वोटर्स अपने वोट देने के अधिकार से वंचित हो गए हैं। शेख हसीना ने कहा कि फिर चाहे हम सरकार में हों या फिर विपक्ष में, हमारी पार्टी अवामी लीग की ताकत को दरकिनार नहीं किया जा सकता है। बांग्लादेश की भलाई के लिए अवामी लीग से बैन हटना जरूरी है। बांग्लादेश के लोग स्थिरता चाहते हैं और बैन व बहिष्कार के चक्र का अंत चाहते हैं। जब हसीना से पूछा गया कि क्या वह बांग्लादेश वापस लौटना चाहती हैं तो उन्होंने जवाब दिया कि बांग्लादेश के प्रति उनकी प्रतिबद्धता अटूट है।
उन्होंने कहा, “मैंने अपनी जिंदगी अपने देश को बेहतर बनाने के लिए लगा दी है और अब भी यह समर्पण कम नहीं हुआ है। मेरे बांग्लादेश लौटने के लिए, पहले बांग्लादेश को स्वतंत्र, निष्पक्ष और सहभागी चुनावों के जरिए से लोकतंत्र को बहाल करना होगा और अवामी लीग को सत्ता में लाना होगा। मैं व्यक्तिगत रूप से सत्ता की तलाश में नहीं हूं और न ही मेरा परिवार को है।”
पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि हर नेता पीछे मुड़कर देखने पर उन फैसलों की पहचान कर सकता है, जिसे उसने अलग तरीके से लिया होता। मैं मानती हूं कि कुछ शिकायतें खासकर सरकारी नौकरियों में आरक्षण से जुड़ी हुईं को और बातचीत के जरिए से हल की जा सकती थीं। हमारे पास इसके लिए तंत्र थे और अतीत में हमने ऐसा किया भी था। हम इस पर और तेजी से कार्रवाई कर सकते थे। बता दें कि बांग्लादेश में पिछले साल आरक्षण के मुद्दे पर हिंसा फैल गई थी, जिसके बाद प्रधानमंत्री आवास तक पर प्रदर्शनकारियों ने हमला बोल दिया था। शेख हसीना इसके बाद पीएम पद से इस्तीफा देकर भारत आ गई थीं। तब से वह यहीं रह रही हैं, जबकि मोहम्मद यूनुस बांग्लादेश सरकार के प्रमुख हैं।

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