धन्यवाद तुम मुझे अपना ना सके ,पर तुमने मुझे ना झाड़ियो में फेंका और ना कुत्तो के नोचने के लिए कचरे के ढेर में छोड़ा

बोल पाती तो शायद यही कहती पालनघर में मिली मासूम नवजात

 

जिला अस्पताल के पालने में गूंजी नवजात बच्ची की किलकारी !

भारत पोस्ट ब्यूरो ,     कोटपूतली- देर रात जिला अस्पताल बीडीएम चिकित्सालय में एक अलार्म बजता है,ड्यूटी पर तैनात सुरक्षा गार्ड जयसिंह पालघर की तरफ़ दौड़ता है, सामने गुलाबी कपड़े में लिपटी एक नवजात मासूम दिखाई देती है,जिसने शायद कुछ घंटे पहले ही खुली हवा में सांस लेना शुरू किया था और कोई उसे पालनघर में छोड़ कर चला गया। बालिका पूर्ण से स्वस्थ्य और सुरक्षित है और शायद उसकी मासूम निगाहे अपने जन्मदातों का इस बात के लिए तो धन्यवाद कर रही है की उन्होंने उसे मरने के लिए ना तो कहीं झाड़ियो में फेंका और ना ही कचरे के ढेर में, नहीं तो नवजात बच्चियो के शरीर को कुत्तो द्वारा नोचे जाने की घटनाएँ इस देश में आम बात है। अब भले ही बच्ची अपने परिवार को ना देख पाए कम से कम दुनिया को देखेगी।
सुरक्षा गार्ड ने बच्ची को सुरक्षित शिशु रोग विभाग में भर्ती करवाया,जहाँ अस्पताल के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉक्टर सुमन यादव की देखरेख में बच्ची का प्राथमिक चिकित्सा परीक्षण किया गया। अस्पताल के पीएमओ डॉक्टर चैतन्य रावत ने बताया कि बच्ची पूरी तरह से स्वस्थ है। स्वास्थ्य परीक्षण के बाद उसे उचित देखभाल के लिए अनाथालय भेजने की प्रक्रिया की जाएगी।

क्या है पालनघर ?——
अक्सर नवजात शिशुओं को झाड़ियों, सड़क के पास या सुनसान जगहों पर फेंकने की खबरें आती हैं. ऐसे में कई बार उनकी असमय मृत्यु हो जाती है. ऐसी घटनाओं में बच्चों नवजात शिशुओं की मौत न हो इसके लिए कोटपुतली बहरोड़ के बीडीएम अस्पताल में पालनाघर बनाया गया है . अगर किसी को कहीं भी कोई नवजात लावारिश हाल में मिले तो उसे यहां छोड़ा जा सकता है। पालघर में लगा पालना एक अलार्म से कनेक्ट होता है जो बच्चा रखने के कुछ मिनट बाद बजता है। अलार्म बजने पर ड्यूटी में तैनात कर्मचारी पालनघर में पहुचंता है और बच्चे को सुरक्षित शिशु इकाई तक पहुंचता है।इस पूरी प्रकिया में नवजात को पालनघर तक पहुचाने वाले की कोई पहचान जाहिर नही होती है

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