हास्य-व्यंग्य और कॉमेडी से भरपूर है फ़िल्म चक्कर चवन्नी का
राजू बोहरा / वरिष्ठ फ़िल्म समीक्षक नई दिल्ली
यह आम धारणा है कि अच्छी फिल्म के लिए बड़ा बजट ज़रूरी होता है, लेकिन जब कहानी, पटकथा, निर्देशन और अभिनय मज़बूत हों,तो सीमित संसाधनों में भी एक साफ-सुथरी और मनोरंजक फिल्म बनाई जा सकती है और इस शुक्रवार को प्रदर्शित हुई कॉमेडी फिल्म “चक्कर चवन्नी का” इसका सटीक उदाहरण है।
लेखक-निर्माता अरविन्द दीक्षित की यह फिल्म 6 फरवरी को उत्तर प्रदेश, राजस्थान, उत्तराखंड और दिल्ली-एनसीआर के सिनेमाघरों में रिलीज़ हो चुकी है और दर्शकों से अच्छा रिस्पॉन्स पा रही है। फिल्म हल्के-फुल्के हास्य के साथ मनोरंजन का पूरा पैकेज है,जिसे हर वर्ग के दर्शक पसंद कर रहे हैं।
फिल्म के सभी पात्र अपने-अपने स्थान पर प्रभावी हैं, लेकिन दानवीर के किरदार में अभिनेता जाहिद शाह ने अपने शानदार अभिनय से फिल्म में चार चाँद लगा दिए हैं। उनका चवन्नी-प्रेम और कंजूसी दर्शकों को खूब हँसाती और गुदगुदाती है। कहें तो फिल्म का केंद्र बिंदु वही हैं—उनका अनोखा स्वभाव ही कहानी को उस मोड़ तक ले जाता है जहाँ भगवान शिव तक उसको क्षमा करने को विवश हो जाते हैं।
अन्य कलाकारों में चाचा-भतीजे की भूमिका में अरविन्द दीक्षित और प्रियोम गुज्जर का अभिनय भी सराहनीय है। दोनों ने अपने सहज अभिनय से कहानी को मज़बूती दी है। फिल्म की नायिका जाह्नवी चौहान स्क्रीन पर आकर्षक लगी हैं और अपने स्वाभाविक, हल्के-फुल्के अभिनय से दर्शकों का ध्यान खींचती हैं।मेहमान कलाकार के रूप में दीपू श्रीवास्तव और रमेश गोयल ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है।
निर्देशक डी. पी. सिंह देव ने फिल्म की गति को कसकर रखा है, जिससे दर्शक कहीं भी बोर नहीं होते। वहीं कैमरामैन अकरम खान ने ग्रामीण परिवेश को बेहद खूबसूरती और सजीवता के साथ कैमरे में कैद किया है। फिल्म का संगीत औसत है, लेकिन टाइटल सॉन्ग “चक्कर चवन्नी का” दर्शकों की ज़ुबान पर चढ़ने की पूरी क्षमता रखता है।
कुल मिलाकर, “चक्कर चवन्नी का” कम बजट में बनी एक साफ-सुथरी, पारिवारिक और मनोरंजक फिल्म है, जिसे पूरे परिवार के साथ एक बार देखा जा सकता है।




