बिहार:बड़हिया टाल में कृषि कार्य चौपट होने के आसार

 

राजीव कुमार झा

बिहार सरकार को बड़हिया टाल क्षेत्र में बाढ़ के पानी के समयानुसार निकास की व्यवस्था करनी चाहिए अन्यथा यहां रबी फसलों की बुआई किसान इस साल नहीं कर पाएंगे और बर्बाद हो जाएंगे। नदी विशेषज्ञों के अनुसार गंगा में निरंतर गाद जमा होने से यहां से बाढ़ का पानी वापस नहीं निकल पा रहा है। नदियों में औद्योगिक प्रदूषण और अपशिष्ट जमाव की समस्या से संभवतः यह स्थिति कायम हुई है। बड़हिया के किसान ज्यादातर खेती बाड़ी पर आश्रित हैं और अपनी जीवन संस्कृति में देश की शान मान जाते हैं लेकिन कृषि कार्य चौपट होने से वे कहीं के नहीं रहेंगे। बड़हिया टाल के आसपास बहने वाली गंगा नदी और टाल क्षेत्र में प्रवाहित होने वाली इसकी सहायक नदियों के साथ टाल की भूमि के नैसर्गिक रिश्तों में आने वाले बदलावों से बरसात के बाद अब गंगा की बाढ़ का पानी
यहां से ठीक से नहीं निकल पाता है और यह जल जमाव
टाल की बर्बादी का सबसे बड़ा कारण सिद्ध होगा। बिहार में रबी फसलों की खेती बाड़ी के लिए सारे देश में प्रसिद्ध बड़हिया टाल चना मसूर दाल का काफी बड़ा उत्पादक क्षेत्र है और यहां के किसान बिहार में अपनी सरलता सादगी के अलावा देश प्रेम और
लोक जीवन चेतना के सच्चे प्रतीक माने जाते हैं ‌ ।

बड़हिया टाल में जलजमाव की समस्या!

जीवन के संघर्ष से कभी मुंह नहीं मोड़ेंगे

बड़हिया में किसान अभूतपूर्व संकट का सामना कर रहे हैं और चुनाव की गहमागहमी में भी यहां सर्वत्र सन्नाटा पसरा है। लेकिन हाथ पर हाथ धरे बैठे रहने से कुछ भी हासिल नहीं होता और अपनी कठिनाइयों को निबटाने के लिए किसानों को कमर कसना होगा। टाल में जल जमाव के मुद्दे पर बड़हिया के किसानों को बीडीओ और सीओ आफिस के शांतिपूर्ण अहिंसक घेराव का कार्यक्रम घोषित करना चाहिए और जिलाधिकारी लखीसराय के कार्यालय पर अनिश्चितकालीन धरना कार्यक्रम का भी ऐलान करना चाहिए। सारे बिहार में यहां के किसान निठल्ले माने जाते हैं और अक्सर वे मोकामा – बरबीघा घूमकर आते हैं तो महारानी स्थान में माथा नवाकर श्रीधर बाबा की जयकार होली के अपने लाटा गीतों में सबसे पहले लगाते हैं कि जीवन के संघर्ष से कभी मुंह नहीं मोड़ेंगे और किसी को अपने मन की कोई बात नहीं बताएंगे लेकिन अब इससे काम चलने वाला नहीं है।

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