तक्षशिला से छेड़छाड़: पाकिस्तान पर बरसा यूनेस्को

-विश्व धरोहर सूची से बाहर करने की दी चेतावनी

विशेष संवाददाता
नई दिल्ली। प्राचीन भारत की गौरवशाली धरोहर तक्षशिला एक बार फिर पाकिस्तान की करतूतों की वजह से विवादों में है। इतिहास से छेड़छाड़ और सच्चाई को अपने हिसाब से ढालने की पुरानी आदत रखने वाले पाकिस्तान पर अब संयुक्त राष्ट्र की सांस्कृतिक संस्था यूनेस्को ने कड़ी आपत्ति जताई है। यूनेस्को का कहना है कि तक्षशिला स्थित मोहरा मोरादु और सिरकप जैसे ऐतिहासिक स्थलों पर किए गए तथाकथित संरक्षण कार्यों ने उनकी असली पहचान और ऐतिहासिक स्वरूप को नुकसान पहुंचाया है। संस्था ने साफ चेतावनी दी है कि अगर पाकिस्तान ने यह हस्तक्षेप नहीं रोके और नुकसान की भरपाई नहीं की, तो तक्षशिला को खतरे वाली सूची में डाला जा सकता है और जरूरत पड़ने पर विश्व धरोहर सूची से बाहर भी किया जा सकता है।
उल्लेखनीय है कि तक्षशिला, जिसे प्राचीन काल में तक्षशिला या तक्षशिला नगरी कहा जाता था, दक्षिण एशिया की सबसे महत्वपूर्ण पुरातात्विक धरोहरों में गिनी जाती है। तक्षशिला सिर्फ एक पुरातात्विक स्थल नहीं, बल्कि भारतीय सभ्यता की हजारों साल पुरानी बौद्धिक और सांस्कृतिक विरासत का जीवंत प्रतीक रही है। वैदिक काल में बसाई गई यह नगरी प्राचीन भारत का एक प्रमुख शिक्षा केंद्र मानी जाती थी, जहां दूर.दूर से विद्यार्थी अध्ययन के लिए आते थे। रामायण और महाभारत जैसे ग्रंथों में भी तक्षशिला का उल्लेख मिलता है। यहां बौद्ध विहारों, प्राचीन नगरों, स्तूपों और मठों के अवशेष आज भी उस समृद्ध इतिहास की गवाही देते हैं, जिसने भारतीय उपमहाद्वीप की सांस्कृतिक दिशा तय की। यही वजह है कि यूनेस्को ने इसे विश्व धरोहर का दर्जा दिया था और इसे दक्षिण एशिया की सबसे महत्वपूर्ण ऐतिहासिक धरोहरों में शामिल माना जाता है।
विवाद की शुरुआत मार्च महीने में हुई, जब एक आगंतुक ने पेरिस स्थित यूनेस्को में पाकिस्तान के स्थायी प्रतिनिधि को कुछ तस्वीरें और सूचनाएं भेजीं। इन तस्वीरों में पंजाब पुरातत्व विभाग द्वारा किए जा रहे निर्माण कार्यों को दिखाया गया था। आरोप लगाया गया कि प्राचीन दीवारों को हटाकर नई दीवारें खड़ी की जा रही हैं और कई स्थानों पर उनकी ऊंचाई भी बढ़ाई जा रही है। इससे ऐतिहासिक संरचनाओं की मौलिकता प्रभावित हो रही है। इसके बाद यूनेस्को ने पाकिस्तान के पुरातत्व और संग्रहालय विभाग तथा राष्ट्रीय धरोहर मंत्रालय के साथ संयुक्त तकनीकी निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान पंजाब पुरातत्व विभाग अपने कार्यों को संरक्षण की प्रक्रिया बताता रहा, लेकिन वह मोहरा मोरादु और सिरकप में किए गए कामों से जुड़े आवश्यक दस्तावेज, प्रभाव मूल्यांकन रिपोर्ट और पहले तथा बाद की तस्वीरें प्रस्तुत नहीं कर सका। यही नहीं, अधिकारियों ने स्वीकार किया कि कई स्थानों पर सीमेंट और आधुनिक निर्माण सामग्री का इस्तेमाल किया गया है।
देखा जाये तो आज तक्षशिला फिर उसी मोड़ पर खड़ी है, जहां संरक्षण और विनाश के बीच की रेखा धुंधली होती दिखाई दे रही है। यह केवल पाकिस्तान की प्रशासनिक लापरवाही का मामला नहीं, बल्कि पूरी मानव सभ्यता की साझा विरासत से जुड़ा प्रश्न है। तक्षशिला ने सदियों तक आक्रमण, उपेक्षा और साम्राज्यों का उत्थान.पतन देखा है, लेकिन अब सबसे बड़ा खतरा उन हाथों से पैदा हो गया है, जो इसे बचाने का दावा कर रहे हैं।

 

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