मुजफ्फरनगर की कवयित्री सुनीता सोलंकी ‘मीना’ से राजीव कुमार झा की बातचीत…

साहित्य: साक्षात्कार

 

प्रश्न: हिंदी के अलावा उर्दू से भी आपका गहरा लगाव है?

उत्तर: हिन्दी के साथ ऊर्दू से लगाव का संबंध है, इस बारे में अपने विषय में कहूँ तो आप ऊर्दू से लगाव कहें या मानवता कहें कि मुझे सभी भाषाओं का सम्मान करना अच्छा लगता है। भले ही मैं उसे जानती नहीं ।मगर उसकी क्षमता को कम नहीं आंकती।

प्रश्न:साहित्य में व्याप्त भाषाई संकीर्णता के बारे में आप क्या कहना चाहती हैं?

उत्तर: हम साहित्यिक क्षेत्र के लोग कैसे भला किसी भाषा को बुरा कह सकते हैं । मुझे तो लगता है कि काश! मुझमें दुनिया की हर भाषा सीखने की क्षमता होती! नफरत फैलाना और वो भी कवि – लेखक होकर कलम के द्वारा? मैं शायद यह कार्य कभी ना कर पाऊँ!
हिन्दी और उर्दू एक ही नदी की दो धाराएँ हैं । हिन्दी-उर्दू का रिश्ता दो बहनों का है। एक ही माँ की दो बेटियाँ हैं।

प्रश्न:आप अपनी प्रकाशित पुस्तकों के बारे में जानकारी दीजिए।

उत्तर मेरी ग्यारह पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। इनमें ग़ज़ल संग्रह उसके बाद ,मुझमें बेइंतहा सा शामिल के अलावा काव्य संग्रह राह रपटीली ,खामोशी बोल पड़ी मेरी लिखी पुस्तकें हैं। सलमा रानी मेरी लघु कहानी की किताब है। वो नजारा हमारी नजर ले गया भी ग़ज़ल संग्रह है। संकरात की खिचड़ी कविता संग्रह है। शाम का तारा काव्य संग्रह है । इसी कड़ी में गोद में कहानियाँ बाल कहानी पुस्तक है।

प्रश्न: मुजफ्फरनगर की सामाजिक – सांस्कृतिक के बारे में जानकारी दीजिए।

उत्तर: मुजफ्फरनगर (उत्तर प्रदेश) की सांस्कृतिक और सामाजिक विरासत अत्यंत समृद्ध है जो प्राचीन पौराणिक काल से लेकर मुगलकालीन इतिहास और आधुनिक स्वतंत्रता संग्राम के ताने-बाने से बुनी गई है।इसे मुख्य रूप से कृषि, सूफी-संतों की परंपरा, और गंगा-जमुनी तहज़ीब के लिए जाना जाता है। विस्तार से समझने के लिए इसकी विरासत को निम्नलिखित बिंदुओं में देखा जा सकता है:

. पौराणिक एवं आध्यात्मिक विरासत – शुक्रताल (शुकतीर्थ): यह मुजफ्फरनगर का सबसे प्रमुख धार्मिक स्थल है जो लगभग 5000 वर्ष पुराना माना जाता है। मान्यता है कि यहीं पर शुकदेव मुनि ने राजा परीक्षित को श्रीमद्भागवत पुराण की कथा सुनाई थी।
संत कल्याणदेव जी: आधुनिक काल में इस भूमि को संतों का आशीर्वाद प्राप्त हुआ, जहाँ स्वामी कल्याणदेव जी ने शिक्षा, चिकित्सा और सामाजिक उत्थान के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया।

२. ऐतिहासिक और स्वतंत्रता संग्राम की पृष्ठभूमि मुगलकालीन स्थापना: इस शहर को 1633 में शाहजहाँ के शासनकाल के दौरान मुगल कमांडर सैयद मुजफ्फर खान बरहा के पुत्र द्वारा बसाया गया था।

आजादी की लड़ाई: मुजफ्फरनगर ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भूमिका निभाई। यहाँ के स्वतंत्रता सेनानियों ने 1940 में जिला कलेक्टर कार्यालय पर कब्जा कर लिया था और ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ के दौरान कई लोगों ने जेल की सजा काटी थी।

. भाषाई एवं कलात्मक विविधता खड़ी बोली का प्रभाव: मुजफ्फरनगर की मूल भाषा खड़ी बोली है, जो हिंदी और हरियाणवी का मिला-जुला रूप है। इसके अलावा, यहाँ की मिली-जुली सामाजिक संरचना में हिंदी और उर्दू का भी गहरा प्रभाव है।

कलाकारों की जन्मस्थली: इस क्षेत्र ने कला और सिनेमा के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है। प्रसिद्ध बॉलीवुड अभिनेता नवाजुद्दीन सिद्दीकी और पार्श्व गायक जावेद अली इसी जिले से ताल्लुक रखते हैं।

४. सामाजिक लोकाचार और कृषि संस्कृति’चीनी का कटोरा’ (Sugar Bowl): मुजफ्फरनगर अपनी उपजाऊ भूमि और बड़े पैमाने पर गन्ने की खेती के लिए प्रसिद्ध है। इसे ‘चीनी का कटोरा’ भी कहा जाता है। इस जनपद में कयी शुगर इंडस्ट्रीज हैं। एशिया फेम की गुड़ मंडी ; नई म॔डी मुजफ्फरनगर उप्र में है।

सामाजिक ताना-बाना: यहाँ विभिन्न समुदायों (जैसे जाट, मुस्लिम, और अन्य जातियां) के बीच कृषि आधारित ‘सम्मान प्रथा’ और साझी जीवनशैली रही है जो इसके क्षेत्रीय लोकाचार का अभिन्न अंग है।

प्रश्न:आप अपनी एक कविता यहां प्रस्तुत कीजिए

उत्तर: यहां अपनी एक कविता प्रस्तुत कर रही हूं –

मेरी दिन
मेरी रचना;
हो सुरक्षित देश मिटने के लिए तैयार हैं ।
हम सभी हालात सहने के लिए तैयार है।

आ नमन करके वतन को शीश अपना दें झुका।
देश पे हर वीर मरने के लिए तैयार हैं।

शारदे तेरी कसम हर हाल में सच्चा लिखूँ।
माँ तिरे चरणों में झुकने के लिए तैयार हैं।।

शारदे हममें भरो माँ भाव की अभिव्यंजना।
शब्द का भंडार लुटने के लिए तैयार है

बात हर सच्ची लिखूँ माँ मुझको आशीर्वाद दो।
लेखनी बेबाक लिखने के लिए तैयार है।।

आ गया मधुमास मनहर हो गया रंगीन सब।
देव सब धरणी उतरने के लिए तैयार है ।।

मनचला भौंरा रहा जब रात कलियों बीच था ।
बस कली खिल जाए,उड़ने के लिए तैयार है

चाँद रोशन हो रहा तो चाँदनी छिटकी धरा।
इक सुहानी भोर उगने के लिए तैयार है।

रात घूंघट जो उतारे दिन निकल जाए तभी।
पट खुले सूरज निकलने के लिए तैयार है

मौन सारी पीर का दिल में समुन्दर है भरा ।
भाव दिल के सब मचलने के लिए तैयार है ।

पंछियों का सुन चहकना आँख अपनी खुल गई।
कुछ कली खिलकर विहँसने के लिए तैयार हैं।।

✍️सुनीता सोलंकी ‘मीना’ मुजफ्फरनगर उप्र

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