जबलपुर की लेखिका राजलक्ष्मी शिवहरे से राजीव कुमार झा की बातचीत…
साहित्य:साक्षात्कार
प्रश्न: अपने घर परिवार शिक्षा और शुरुआती जीवन के बारे में बताइए?
उत्तर – -मेरा जन्म बाईस फरवरी सन उन्नीस सौ उनचास को हुआ।गोंदिया महाराष्ट्र में। मेरे पिता स्व. शशिकुमार गुप्ताजी एडवोकेट और बाबाजी मोहन लाल गुप्ता जी बाररूम के प्रेसिडेंट थे। मां स्व.चन्द्रकला गुप्ताजी गृहिणी और आध्यात्मिक थीं। पांच बड़े भाईयों की मैं सबसे छोटी बहिन हूँ । मेरी शिक्षा मैट्रिक तक गोंदिया में हुई। शादी के बाद पूरी शिक्षा इंटर, , बी.ए., एम.ए. पी.एचडी हुई । चूंकि पतिदेव इंजीनियरिंग कॉलेज जबलपुर में प्रोफेसर थे इसलिए पढ़ाई आसानी से हुई ।
प्रश्न: आपके हिन्दी भाषा और साहित्य से संबंधित सेवाओं को जानकर खुशी होगी।
उत्तर: लेखन में पहली कविता नवभारत में सन चौंसठ में प्रकाशित हुई। पच्चीस किताबें प्रकाशित हुई।
अध्यापन कार्य किया। विदेशयात्राएं की। आठवें विश्व हिंदी सम्मेलन में अमेरिका गये।
समकालीन साहित्य सम्मेलन में लंदन और दुबई गये।
प्रश्न: “पाषाण पिघल रहा है” अपने इस उपन्यास के बारे में जानकारी दीजिए।
उत्तर: ” पाषाण पिघल रहा है” तेरह भागों में क्रमशः प्रकाशित हुआ।
उपन्यास की नायिका अपने कठोर नियमों पर चलती है परंतु पति के नम्र और शालीन व्यवहार के कारण बदल जाती है।
प्रश्न: वर्तमान में अपने जीवन और कार्यों के बारे में बताइए।
उत्तर : मैं अभी जबलपुर मध्यप्रदेश में रहती हूँ । चूंकि मैं गद्य लेखिका हूँ गुरुदत्त, बंकिमचन्द्र, शरतचंद्र, प्रेमचंद जी मेरे प्रिय लेखक हैं।
छायावाद पर पी.एचडी की है अतः महादेवी वर्मा, जयशंकर प्रसाद, निराला जी और सुमित्रानंदन पंत जी मेरे प्रिय कवि हैं।



