“हृदय से संवाद करती है हिंदी कविता”* डॉ. अनिता गोस्वामी से राजीव कुमार झा की बातचीत
एसोसिएट प्रोफेसर
प्रश्न -1. अपने बचपन, परिवार और शिक्षा के बारे में बताइए।
उत्तर – मैं डॉ. अनिता गोस्वामी हूँ। वाराणसी की आध्यात्मिक और शैक्षिक हवा में मेरा बचपन बीता, जिसने मेरे विचारों को गहराई दी। पिता वाराणसी में अंग्रेज़ी के व्याख्याता रहे – शिक्षा और साहित्य के प्रति उनका समर्पण मेरी प्रेरणा बना। माता गृहिणी हैं, जिन्होंने परिवार के संस्कारों से मेरा व्यक्तित्व गढ़ा। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से मैंने अंग्रेज़ी साहित्य में B.A., M.A., मास्टर इन जर्नलिज़्म और http://M.Phil. किया। गोरखपुर विश्वविद्यालय से http://B.Ed. किया। फिर हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय से अंग्रेज़ी साहित्य में Ph.D. की। शिक्षा की जिज्ञासा और साहित्य की रुचि ही मुझे आगे ले गई।
प्रश्न- 2. कविता लेखन की ओर झुकाव कब और कैसे हुआ?
उत्तर – मेरा जन्म साहित्यिक परिवार में हुआ। नानाजी हिंदी के प्राध्यापक थे, पिताजी अंग्रेज़ी के व्याख्याता। घर में हिंदी-अंग्रेज़ी साहित्य का माहौल था। पत्रकारिता में मास्टर्स के बाद मैं ‘दैनिक जागरण’, ‘अमर उजाला’ और ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ के लिए फ्रीलांस पत्रकार रही। आकाशवाणी और दूरदर्शन से भी जुड़ी। पर कविता की असली शुरुआत Ph.D. के दौरान उत्तराखंड में हुई। वहाँ की प्राकृतिक सुंदरता, शांत वातावरण और जीवन के अनुभवों ने मेरी संवेदनाओं को नई दिशा दी। तभी से नियमित कविता लिखने लगी। कोविड-19 महामारी के बाद लेखन और सक्रिय हुआ। अब तक 100 से अधिक कविताएँ लिखी हैं और 300 से अधिक काव्य मंचों पर रचनापाठ का सौभाग्य मिला है। कविता मेरे लिए समाज, प्रकृति और मानवीय संवेदनाओं से संवाद का सशक्त माध्यम है।
प्रश्न – 3. हिंदी और अंग्रेज़ी में कविता लिखते हुए क्या फर्क महसूस करती हैं?
उत्तर – दोनों सशक्त भाषाएँ हैं, पर अनुभव अलग है। अंग्रेज़ी में लिखते समय विचारों की स्पष्टता, संरचना और वैश्विक दृष्टिकोण पर ध्यान रहता है। वहाँ प्रतीकात्मकता और बौद्धिक विमर्श की गुंजाइश ज्यादा है। हिंदी में लिखते समय मैं अपनी भावनाओं, संस्कृति और लोकजीवन के अधिक निकट महसूस करती हूँ। हिंदी की सहजता, मधुरता और भावात्मक गहराई मुझे आत्मीयता से व्यक्त करने का अवसर देती है। हिंदी में लगता है मानो मैं सीधे अपने हृदय से संवाद कर रही हूँ।
प्रश्न – 4. आपके Ph.D. शोध का विषय क्या था?
उत्तर – मेरा शोध विषय था: “भारती मुखर्जी के उपन्यासों में जेंडर, वर्ग और संस्कृति का अध्ययन”। यह शोध मुख्यतः प्रवासी भारतीय महिलाओं के जीवन पर है – जो विदेशों में जाकर अपनी पहचान स्थापित करने के दौरान सामाजिक-सांस्कृतिक चुनौतियों से जूझती हैं। मैंने विश्लेषण किया कि वे कैसे नई संस्कृति को अपनाते हुए भी अपनी भारतीय पहचान और मूल्यों को बनाए रखने का संघर्ष करती हैं। साथ ही यह भी देखा कि लिंग, वर्ग और संस्कृति उनके जीवन, संघर्ष और अस्तित्व को कैसे प्रभावित करते हैं।
प्रश्न – 5. अपनी पुस्तकों के बारे में बताइए।
उत्तर – अब तक अंग्रेज़ी में मेरी कुल पाँच पुस्तकें हैं – तीन प्रकाशित, दो प्रकाशनाधीन। विषय मुख्यतः अंग्रेज़ी साहित्य, भाषा, व्याकरण, जेंडर स्टडीज़ और समकालीन साहित्यिक विमर्श से जुड़े हैं। इसके अलावा मेरी कविताएँ ‘रेख्ता’, ‘अमर उजाला काव्य’ तथा विभिन्न ई-जर्नल्स और ‘काव्य रत्न’ जैसी पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रही हैं। साहित्यिक योगदान के लिए मुझे ‘अटल बिहारी वाजपेयी रत्न सम्मान’, ‘नेपाल इंटरनेशनल साहित्य सम्मान’, ‘नारी वंदन सम्मान’ सहित 200 से अधिक सम्मान मिल चुके हैं। लेखन मेरे लिए समाज और संस्कृति के प्रति प्रतिबद्धता व्यक्त करने का माध्यम है।
प्रश्न – 6. अंग्रेज़ी के प्रिय लेखक-कवि कौन हैं?
उत्तर – कवियों में शेक्सपीयर, वर्ड्सवर्थ, कीट्स, टी.एस. एलियट, रॉबर्ट फ्रॉस्ट और एमिली डिकिन्सन पसंद हैं। इनकी रचनाओं में प्रकृति, दर्शन और मानवीय संवेदनाएँ प्रभावी ढंग से आई हैं। उपन्यासकारों में जेन ऑस्टेन, चार्ल्स डिकेन्स, वर्जीनिया वुल्फ, टोनी मॉरिसन, भारती मुखर्जी और सलमान रुशदी प्रिय हैं। भारती मुखर्जी ने मुझे खास प्रभावित किया क्योंकि मेरा शोध उन्हीं पर है। मैं समकालीन भारतीय अंग्रेज़ी लेखकों को भी नियमित पढ़ती हूँ। अच्छा लेखक हमें समाज और जीवन को देखने की नई दृष्टि देता है।
प्रश्न- 7. कविता के अलावा अन्य अभिरुचियाँ?
उत्तर – अध्ययन, शोध, पुस्तक लेखन, पत्रकारिता और सामाजिक-सांस्कृतिक गतिविधियों में रुचि है। नई पुस्तकें पढ़ना, साहित्यिक शोध करना और समसामयिक विषयों पर लिखना पसंद है। देश की साहित्यिक यात्राएँ करना भी प्रमुख रुचि है – नई जगहों की भाषा, लोक परंपरा और सामाजिक जीवन को समझना मेरे लेखन को समृद्ध करता है। कवि सम्मेलनों, संगोष्ठियों और अकादमिक सेमिनारों में भाग लेना अच्छा लगता है।
प्रश्न – 8. रुड़की के शैक्षिक-सांस्कृतिक परिवेश पर आपकी राय?
उत्तर – मैं वर्तमान में रुड़की के एक विश्वविद्यालय में अंग्रेज़ी विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर हूँ। यहाँ की शिक्षा व्यवस्था विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर आधारित है – गुणवत्तापूर्ण शिक्षण, शोध, नवाचार और व्यावहारिक ज्ञान पर बल दिया जाता है। रुड़की ऐतिहासिक, शैक्षिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण नगर है। शिक्षा और तकनीकी संस्थानों के साथ-साथ यह साहित्यिक गतिविधियों का भी सक्रिय केंद्र है। यहाँ समय-समय पर कवि सम्मेलन, साहित्यिक गोष्ठियाँ, पुस्तक विमोचन और सांस्कृतिक कार्यक्रम होते रहते हैं, जिनसे साहित्य और संस्कृति को प्रोत्साहन मिलता है।
प्रश्न – 9. देश-विदेश की यात्राओं का अनुभव?
उत्तर – देश-विदेश की अनेक यात्राओं का अवसर मिला है। भारत के विभिन्न राज्यों में संस्कृति, साहित्य, लोक परंपराओं और सामाजिक जीवन को निकट से देखा-समझा। इन अनुभवों ने मेरे व्यक्तित्व और लेखन दोनों को समृद्ध किया। विदेश यात्राओं में विभिन्न देशों की संस्कृति, शिक्षा व्यवस्था और साहित्यिक गतिविधियों को जानने का मौका मिला। इन यात्राओं ने दृष्टिकोण व्यापक बनाया और मानवीय मूल्यों की समानता को समझने में मदद की। मेरा मानना है कि यात्राएँ केवल नए स्थान देखने का माध्यम नहीं, बल्कि जीवन और समाज को नए दृष्टिकोण से समझने का अवसर हैं। यही अनुभव मेरी रचनाओं में भी झलकते हैं।




