डॉ. इंदु जैन ‘इंदू’ से राजीव कुमार झा की विशेष बातचीत
साक्षात्कार
शब्दों में समाज को बदलने की शक्ति होती है… डॉ इंदु जैन।
प्रश्न: समाज में मनुष्य के जीवन के जिन प्रसंगों ने आपको लेखन की ओर उन्मुख किया, उनके बारे में बताइए?
उत्तर:मेरे लिए लेखन केवल शब्दों का संयोजन नहीं, बल्कि अपने भावों की ,संवेदनाओं की अभिव्यक्ति है। मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है हम भी उसी समाज का हिस्सा है ।जो सामाजिक घटनाएं, सुख- दुख देखते हैं तो मन में विचार उमड़ते हैं। इन्हीं अनुभूतियों ने मुझे लेखन की ओर प्रेरित किया। मुझे लगता है कि साहित्य समाज का दर्पण है और एक साहित्यकार का दायित्व है कि वह अपने समय की संवेदनाओं को शब्द दे।
प्रश्न :आपने लेखन कब शुरू किया? आज के दौर में लेखन को लेकर कैसा माहौल है?
उत्तर:अपने साहित्यिक सफर में रचनात्मक स्तर पर अपने कार्यों को लेकर क्या कहना चाहेंगी?
लेखन की रुचि बचपन से ही थी। प्रारंभ में डायरी लेखन और छोटी-छोटी रचनाओं से शुरुआत हुई, जो धीरे-धीरे साहित्य साधना में परिवर्तित हो गई।
आज का समय साहित्य के लिए अवसरों से भरा हुआ है। डिजिटल मंचों ने लेखकों को व्यापक पहचान दी है, किंतु इसके साथ गुणवत्ता और साहित्यिक मूल्यों को बनाए रखने की चुनौती भी बढ़ी है। अपने साहित्यिक सफर में मैंने कविता, गीत, ग़ज़ल, पूर्णिका, छंद, मुक्तक, हायकु, लघुकथा, बाल कथा और आलेख जैसी अनेक विधाओं में लेखन किया है। मेरी प्रकाशित पुस्तक “अंदाज़-ए-इंदु” तथा विभिन्न साझा संकलनों में प्रकाशित रचनाएँ मेरे साहित्यिक प्रयासों की उपलब्धियाँ हैं। मैं स्वयं को अभी भी साहित्य की एक सतत् साधक मानती हूँ।
प्रश्न :अपने बचपन, माता-पिता, घर-परिवार और पढ़ाई-लिखाई के बारे में बताएं।
उत्तर: मेरा बचपन संस्कारों, स्नेह और पारिवारिक मूल्यों से समृद्ध वातावरण में बीता। माता-पिता ने सदैव शिक्षा, अनुशासन और मानवीय संवेदनाओं का महत्व समझाया। परिवार से मिले संस्कारों ने ही मुझे साहित्य और समाज सेवा के प्रति समर्पित बनाया। पढ़ाई के साथ-साथ मुझे साहित्यिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों में विशेष रुचि रही। पुस्तकें मेरी अच्छी मित्र रहीं और यही लगाव आगे चलकर लेखन की प्रेरणा बना।
प्रश्न :अपने प्रिय लेखकों के बारे में जानकारी दीजिए।
उत्तर: हिंदी साहित्य के अनेक रचनाकार मेरे प्रेरणा स्रोत रहे हैं। राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ , महादेवी वर्मा , प्रेमचन्द, हरिवंश राय बच्चन तथा मैथिलीशरण गुप्त इन महान लेखकों को बचपन से ही पाठ्यक्रम में भी पढ़ा है तो इन्हीं से प्रभावित हूँ। इन साहित्यकारों की रचनाएँ आज भी मार्गदर्शन देती हैं और साहित्य के प्रति समर्पण की प्रेरणा प्रदान करती हैं।
प्रश्न :लेखिका के रूप में पाठकों को क्या संदेश देना चाहती हैं?
उत्तर: मैं पाठकों से कहना चाहूँगी कि साहित्य जीवन को बेहतर ढंग से समझने की कला सिखाता है। पढ़ने की आदत व्यक्ति के विचारों को समृद्ध बनाती है और उसे संवेदनशील नागरिक बनने में सहायता करती है। आज के समय में हमें प्रेम, मानवीयता, संस्कार और सामाजिक जिम्मेदारी जैसे मूल्यों को अपने जीवन में पुनः स्थापित करने की आवश्यकता है । मेरा विश्वास है कि शब्दों में समाज को बदलने की शक्ति होती है, बस उन्हें सही दिशा और उद्देश्य के साथ प्रयोग किया जाना चाहिए।



