पश्चिम बंगाल की राजनीति के ‘चाणक्य’ मुकुल राय का निधन, कोलकाता के निजी अस्पताल में ली अंतिम सांस

 

अजित प्रसाद

कोलकाता/कांचरापाड़ा: पश्चिम बंगाल की राजनीति के दिग्गज और ‘चाणक्य’ कहे जाने वाले मुकुल राय का रविवार देर रात कोलकाता के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। 1998 में तृणमूल कांग्रेस (TMC) की स्थापना के प्रमुख शिल्पकारों में से एक रहे राय पिछले कई दशकों से बंगाल की राजनीति के केंद्र में थे। उनके निधन की खबर से राजनीतिक गलियारों और उनके पैतृक आवास कांचरापाड़ा में शोक की लहर दौड़ गई है।

मुकुल राय का राजनीतिक करियर बेहद उतार-चढ़ाव भरा और प्रभावशाली रहा। उन्होंने यूपीए (UPA) सरकार के दौरान 6 महीने तक देश के रेल मंत्री के रूप में कार्य किया। इससे पहले वे लगभग 3 वर्षों तक केंद्रीय जहाजरानी और बंदरगाह राज्य मंत्री भी रहे। 2012 का रेल बजट विवाद आज भी याद किया जाता है, जब ममता बनर्जी के कड़े रुख के बाद तत्कालीन रेल मंत्री दिनेश त्रिवेदी को इस्तीफा देना पड़ा था और मुकुल राय ने उनकी जगह लेकर यात्री किराया वृद्धि को वापस ले लिया था।

सितंबर 2017 में मुकुल राय ने तृणमूल कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया था, जिसके बाद उन्हें 6 साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया गया। उन्होंने भाजपा का दामन थामा और वहां राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाली। हालांकि, 2021 के विधानसभा चुनावों के बाद 11 जून को उन्होंने ममता बनर्जी की मौजूदगी में पुनः TMC में ‘घर वापसी’ की थी।

मई 2021 में कृष्णनगर उत्तर से विधायक चुने जाने के बाद वे पीएसी (PAC) कमेटी के अध्यक्ष बने। उनकी सदस्यता को लेकर दल-बदल विरोधी कानून के तहत लंबा कानूनी विवाद चला। हाल ही में 16 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने उनकी विधायक पद की अयोग्यता पर अंतरिम रोक लगाई थी।

*शुभ्रांशु राय (मुकुल राय के पुत्र)*
“मेरे पिता ने अपना पूरा जीवन बंगाल की जनता और राजनीति को समर्पित कर दिया। वे केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि हजारों कार्यकर्ताओं के मार्गदर्शक थे। उनका जाना हमारे परिवार और बंगाल की राजनीति के लिए एक अपूरणीय क्षति है। आज कांचरापाड़ा और पूरे बंगाल के लोग एक ‘अभिभावक’ को खो चुके हैं।”

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button