जलदापाड़ा में हाथी पूजा: मानव और प्रकृति के रिश्ते का प्रतीक
पार्थ प्रतिम दास/अलीपुरद्वार (पश्चिम बंगाल): जलदापाड़ा राष्ट्रीय उद्यान के हृदय स्थल में बुधवार को एक अनोखी तस्वीर देखने को मिली। विश्वकर्मा पूजा के दिन न केवल उपकरणों का, बल्कि प्रकृति की अमूल्य धरोहर, हाथी का भी सम्मान किया गया। उद्यान के कुनकी हाथियों के लिए एक विशेष पूजा का आयोजन किया गया।
कुनकी हाथियों मैनाक, श्रीकांत, श्रीनिवास, ललिता, मातंगिनी और मेनका का श्रृंगार किया गया और फिर पूरे विधि-विधान से उनकी पूजा की गई। पूजा के बाद, इन प्यारे जानवरों को केले, नारियल, गन्ना सहित विभिन्न फल खिलाए गए।
वनकर्मियों ने बताया कि ये हाथी न केवल सफारी पर आने वाले पर्यटकों के साथी हैं, बल्कि वनों की रखवाली और दुर्लभ वन्यजीवों की सुरक्षा के प्रमुख आधारों में से एक हैं। इसलिए, उनके स्वास्थ्य और दीर्घायु के लिए हर साल यह पूजा आयोजित की जाती है।
स्थानीय लोग कहते हैं, “यह पूजा दरअसल हाथियों के प्रति हमारी कृतज्ञता का प्रतीक है। उनके बिना, जंगल सुरक्षित नहीं रह पाते और पर्यटन उद्योग भी उतना सफल नहीं हो पाता।”
यह दिन पर्यटकों के लिए भी खास था। उनका मानना है कि जलदापाड़ा में हाथियों की पूजा सिर्फ़ एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि इंसानों और जानवरों के सह-अस्तित्व का एक ज्वलंत उदाहरण है।

