यमुना के बाढ़ डूब भूभाग पर अवैध कॉलोनी आबाद
कॉलोनी को लेकर लोगों में संशय व्याप्त

-धार्मिक या व्यावसायिक गतिविधियों पर रोक
-डीडीए, निगम व दिल्ली पुलिस की तिकड़ी से आबाद होती कॉलोनी
अखिलेश कुमार अखिल नई दिल्ली। पूर्वी दिल्ली के बाढ़ डूब भूभाग पर भूमाफियाओं का बोलवाला है। अक्षर धाम से ओखला तक अवैध आबादी आबाद हो गई है। जानकरी के मुताबिक यमुना के बाढ़ क्षेत्र को सरकार द्वारा किसानों को खेतीबाड़ी के लिए पट्टे पर जमीन दी गई थी जिसे उन लोगों ने भूमाफियाओं के हाथ इन जमीनों को बेच दिया जहां आज लाखों की संख्या में लोगबाग पक्के मकान बना लिए है। गौरतलब है कि इस भूभाग में कई कॉलोनियां आबाद हो गई हैं। इस बीच, दिल्ली हाई कोर्ट ने यमुना नदी के बाढ़ क्षेत्र में किसी भी प्रकार की धार्मिक या व्यावसायिक गतिविधियों पर रोक लगा दी है।

न्यायमूर्ति जसमीत सिंह की पीठ ने पर्यावरण संरक्षण के हित और क्षेत्र की पारिस्थितिक संवेदनशीलता को देखते हुए बाढ़ क्षेत्र में किसी भी प्रकार की व्यावसायिक और धार्मिक गतिविवधियों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने की बात कही है। सवाल यह नहीं है कि इस क्षेत्र में जो जनसंख्या अवैध रुप से आबाद हो गई है उसका निराकरण किया होगा। इसी क्षेत्र के बदरपुर कालिन्दी कुंज थाना क्षेत्र के जैदपुर पार्ट-2 में एक गड्डा कॉलोनी आबाद हो गई है। यमुना के दलदली जमीन पर भूमाफियाओं ने प्लॉटिंग कर बेच दिया है। दरअसल, अन्य राज्यों से आये प्रवासी लोग बगैर जानकारी के जमीन खरीद कर चार-पांच मंजिल का स्थायी मकान बना लिए हैं। कई मकान में बेसमेंट भी बनाया गया है। गरीब लोग जीवन भी की जमा पूंजी लगाकर आशियाना बना लिये हैं जिसका भविष्य अधर में लटक गया है।
सवाल यह है कि यमुना के दलदली वाले क्षेत्र को बेचना अपराध है, लेकिन दिल्ली विकास प्राधिकरण, दिल्ली नगर निगम और दिल्ली पुलिस की तिकड़ी से अवैध रुप से आबाद ऐसी कॉलोनी को लेकर लोगों में संशय व्याप्त है। पिछले दिनों दिल्ली के अनियमित कॉलोनियों नियमितिकरण में गड्डा कॉलोनी का नाम नहीं है। यहां दिल्ली जल बोर्ड द्वारा पानी की सुविधा मुहैया कराई जा रही है। बिजली की भी व्यवस्था है। लेकिन सवाल यह है कि क्या इस कॉलोनी को नियमित किया जा सकता है। सबसे अहम् सवाल यह है कि बाढ़ डूब क्षेत्र है और प्रशासन के भ्रष्टाचार को सरकार द्वारा मुहर लगाया जा सकता है।

