केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने भारत के डेटा सेंटर इकोसिस्टम पर एनएफपीआरसी फाउंडेशन-सीएआईजी की रिपोर्ट जारी की

रिपोर्ट में डेटा सेंटर के निर्माण के लिए उपयुक्त 90 से ज्यादा भारतीय शहरों की पहचान की गई है। अनुमान है कि वर्ष 2030 तक भारत की डेटा सेंटर क्षमता 4 से 8 गीगावाट तक हो सकती है

 

भारत पोस्ट न्यूज़ नई दिल्ली, मई, 2026: केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री श्री जितिन प्रसाद ने नेशन फर्स्ट पॉलिसी रिसर्च एंड चेंज फाउंडेशन (एनएफपीआरसी) के अंतर्गत सेंटर फॉर एक्सेलरेटिंग इंडियाज़ ग्रोथ (सीएआईजी) द्वारा तैयार रणनीतिक रिपोर्ट ‘बियॉन्ड इंफ्रास्ट्रक्चर: इंडियाज़ डेटा सेंटर पाथवे टू डिजिटल सॉवरिन्टी’ को जारी किया।
रिपोर्ट को लॉन्च करने का इवेंट इंडिया हैबिटेट सेंटर में आयोजित हुआ। इसमें नीति निर्माता, इंडस्ट्री के दिग्गज शख्सियत, तकनीकी एक्सपर्ट्स और शोधकर्ताओं ने हिस्सा लिया और भारत के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर इकोसिस्टम पर विचार-विमर्श किया।
रिपोर्ट्स के अनुमान के मुताबिक भारत की डेटा सेंटर क्षमता 2030 तक 4 से 8 गीगावाट तक हो सकती है। इस रिपोर्ट ने भविष्य में डेटा सेंटर के निर्माण के लिए उपयुक्त 90 शहरों की पहचान की है। रिपोर्ट इस बात पर भी प्रकाश डालती है कि देश की तेज़ी से बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था को सहयोग देने के लिए टिकाऊ और मज़बूत इंफ्रास्ट्रक्चर योजना की ज़रूरत है।
इवेंट में उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए श्री जितिन प्रसाद ने कहा कि भारत के डेटा सेंटर इकोसिस्टम देश की तकनीकी और आर्थिक महत्वाकांक्षाओं के लिए ज़रूरी रणनीतिक राष्ट्रीय इंफ्रास्ट्रक्चर के तौर पर विकसित हो रहे है।
उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्लाउड कंप्यूटिंग, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और 6जी जैसी भविष्य की तकनीकों के प्रचलन से यह तय करने में डेटा सेंटर्स का महत्व काफी बढ़ जाएगा कि डिजिटल वैल्यू कहाँ निर्मित और प्रोसेस की जाती है।
इवेंट में बोलते हुए एनएफपीआरसी फाउंडेशन के चेयरपर्सन श्री तरंग चुघ ने कहा कि डेटा सेंटर राष्ट्रीय इंफ्रास्ट्रक्चर के एक महत्वपूर्ण स्तंभ और रणनीतिक स्वायत्तता (ऑटोनॉमी) के साधन बनते जा रहे हैं।
उन्होंने जोर देते हुए कहा कि भारत में डिजिलॉकर और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर जैसी पहलों की वजह से डिजिटल सेवाओं की माँग तेजी से बढ़ रही है। इस बढ़ती माँग को पूरा करने के लिए मजबूत बैकएंड इंफ्रास्ट्रक्चर जरूरी है। श्री चुघ ने यह भी कहा कि निवेश और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को बढ़ावा देने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के बीच बेहतर तालमेल होना बहुत जरूरी है।
राज्यसभा सांसद और संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी संसदीय स्थायी समिति के सदस्य श्री सुजीत कुमार ने कहा कि भारत मल्टी गीगावॉट डेटा सेंटर इकोनॉमी में तेज़ गति से बढ़ रहा है। ऐसा एआई वर्कलोड, क्लाउड सर्विस, फाइनेंशियल सर्विस और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर की बढ़ती माँग की वजह से हुआ है।
उन्होंने बताया कि हर साल बिलियन डिजिटल ट्रांज़ैक्शन होते हैं। वहीं हर दिन करीबन 70 मिलियन यूपीआई ट्रांजैक्शन्स होते हैं इसलिए डेटा सेंटर अब भारत की डिजिटल इकोनॉमी के लिए एक प्रमुख स्तंभ बन गए हैं।

यह रिपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर-ग्रेड योजना के लिए ढांचा तय करती है। इस योजना में ग्रिड-इंटीग्रेटेड बिजली सप्लाई, पानी बचाने वाले कूलिंग सिस्टम और समन्वित नीतियों (कोऑर्डिनेटेड पॉलिसी) का क्रियान्वयन शामिल हैं। इसमें डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की योजना को पूरे सिस्टम के स्तर पर सोचकर बनाने की बात कही गई है। साथ ही डेटा सेंटर के निर्माण को पर्यावरण संरक्षण और लंबे समय तक टिकाऊ विकास के साथ जोड़ने पर भी जोर दिया गया है।
इवेंट में ‘पॉवर, पॉलिसी एंड प्लेटफॉर्म्स: बिल्डिंग इंडियाज़ डिजिटल बैकबोन’ शीर्षक से एक पैनल चर्चा भी हुई। इस चर्चा में सरकार, इंडस्ट्री और नीति संगठनों के कई प्रतिनिधि शामिल हुए। सभी ने ऊर्जा, सस्टेनेबिलिटी, एआई इकोसिस्टम और रेगुलेटरी फ्रेमवर्क संबंधित चुनौतियों पर बात की।
इन चर्चाओं में भारत की तकनीकी आकांक्षाओं के साथ इन्फ्रास्ट्रक्चर की क्षमता को बेहतर करने के महत्व पर ज़ोर दिया गया। इसके अलावा पर्यावरण संरक्षण यानि सस्टेनेबिलिटी, लचीलेपन और नीतिगत सामंजस्य सुनिश्चित करने पर भी बल दिया गया।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button