पंचकोसी परिक्रमा का आगाज इसका शुभारंभ
रिपोर्ट : विनय चतुर्वेदी (विशेष संवाददाता )
बक्सर. पांच दिवसीय बक्सर (सिद्धाश्रम) पंचकोसी परिक्रमा का आगाज इसका शुभारंभ नगर के अहिल्या धाम अहिरौली पुआ-पकवान खाकर मार्गशीर्ष अगहन मास के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि को यह पौराणिक परिक्रमा प्रारंभ होती है, जिसका समापन दशमी तिथि को चरित्रवन में लिट्टी-चोखा के महाभोज के साथ होता है.
परिक्रमा में शामिल श्रद्धालु अलग-अलग दिन अलग-अलग स्थलों पर पहुंचते हैं तथा भजन कीर्तन करते रात गुजारते हैं. पांच परिक्रमा स्थल व उसका पौराणिक महत्व पंचकोसी परिक्रमा का पहला विश्राम सदर प्रखंड के अहिरौली में होता है. वहां अहिल्या माता का दर्शन-पूजन कर पुआ-पकवान खाने का विधान है. परिक्रमा का जत्था दूसरे दिन नदांव पहुंचता है. वहां नारद सरोवर में स्नान आदि के बाद खिचड़ी का प्रसाद खाया जाता है.
मान्यता के अनुसार त्रेतायुग में वहां देवर्षि नारद का आश्रम था. तीसरे दिन की परिक्रमा भार्गव आश्रम भभुअर पहुंचती है. वहां भार्गव सरोवर में स्नान व पूजन-अर्चन के बाद चूड़ा-दही का प्रसाद चखा जाता है. चौथे दिन का पड़ाव नुआंव स्थित अंजनी सरोवर के तट पर रहता है. वहां सत्तू व मूली का प्रसाद ग्रहण कर श्रद्धालु रात्रि विश्राम करते हैं.
पांचवें व अंतिम दिन का पड़ाव विश्वामित्र आश्रम चरित्रवन में रहता है और वहां गंगा स्नान कर पूजन-अर्चन के बाद श्रद्धालु लिट्टी-चोखा का प्रसाद ग्रहण कर रात गुजारते हैं. त्रेतायुग में प्रभु श्रीराम ने की थी परिक्रमा मान्यता के अनुसार त्रेतायुग में बक्सर पहुंचने पर प्रभु श्रीराम ने परिक्रमा की थी. वे अनुज लक्ष्मण के साथ पांच कोस के दायरे में रहने वाले ऋषि-मुनियों से आशीर्वाद लेने पहुंचे थे.



