ममता का गर्जन: “तृणमूल अब समुद्र है, इसकी एक लहर में तिनके की तरह बह जाएगी भाजपा”
चंद्रकोणा (पश्चिम मेदिनीपुर). :घाटाल सांगठनिक जिले के चंद्रकोणा विधानसभा क्षेत्र से तृणमूल कांग्रेस प्रत्याशी सूर्यकांत डोलई के समर्थन में आयोजित एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भाजपा पर तीखा हमला बोला। चरकडांगा मैदान में उमड़े जनसैलाब के बीच ममता बनर्जी ने स्पष्ट किया कि बंगाल के नागरिकों के अधिकारों का हनन वे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेंगी।मुख्यमंत्री ने सुबह समाचार पत्रों में छपी उन तस्वीरों का जिक्र किया जिनमें लोग वोटर लिस्ट से नाम कटने के बाद लंबी कतारों में खड़े थे। उन्होंने भावुक होते हुए कहा:”मैंने देखा कि हमारी मां-बहनें, आदिवासी भाई और अल्पसंख्यक समुदाय के लोग लाइनों में खड़े हैं। यह देखकर मुझे बहुत दुख हुआ। बंगाल के लोगों के नाम काटकर बिहार, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के लोगों को यहां घुसाया जा रहा है। भाजपा ट्रेनों में भरकर बाहरी लोगों को ला रही है ताकि बंगाल के असली नागरिकों को हटाकर चुनाव जीता जा सके। लेकिन जब तक मैं हूँ, बंगाल को ‘वध’ करने की उनकी यह साजिश सफल नहीं होगी।”चंद्रकोणा की उपजाऊ मिट्टी और विद्यासागर की भूमि का जिक्र करते हुए ममता बनर्जी ने आलू किसानों के संकट पर बात की। उन्होंने वादा किया:आलू की कीमत न मिलने से जो किसान प्रभावित हुए हैं, उन्हें सरकार मुआवजा देगी। स्कूलों के मिड-डे मील और आंगनवाड़ी केंद्रों (ICDS) के लिए सरकार खुद किसानों से आलू खरीदेगी। उन्होंने भाजपा नेताओं को चेतावनी दी कि वे आलू की राजनीति करना बंद करें।ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार पर कटाक्ष करते हुए कहा कि भाजपा ने लोगों को केवल कतारों में खड़ा किया है।”नोटबंदी की लाइन, केरोसिन की लाइन, आधार की लाइन, गैस की लाइन और अब वोटर लिस्ट (SIR) की लाइन। बंगाल के लोगों को और कितनी लाइनों में खड़ा किया जाएगा? अब समय आ गया है कि भाजपा खुद ‘बेलाइन’ हो जाए।”उन्होंने आगे कहा कि भाजपा अब यह तय करना चाहती है कि लोग क्या खाएंगे। “वे कह रहे हैं कि बंगाल के लोग मछली-मांस नहीं खाएंगे। तो क्या वे सिर खाएंगे? बंगाल विरोधी भाजपा को राज्य की जनता कभी स्वीकार नहीं करेगी।”मुख्यमंत्री ने यह दावा कर सबको चौंका दिया कि रामकृष्ण मिशन, भारत सेवाश्रम संघ और बेलूर मठ के कई साधु-संतों के नाम भी वोटर लिस्ट से गायब हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या अब साधु-संतों को भी भाजपा के सामने अपनी नागरिकता साबित करनी होगी?

