शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले!

बिहार:बड़हिया

 

राजीव कुमार झा

लखीसराय के बड़हिया में थाना के पास कर्पूरी ठाकुर के मुख्यमंत्रित्व काल में नगर में अपराध के खिलाफ उग्र प्रदर्शन के दौरान पुलिस फायरिंग में शहीद होने वाले ज्ञान भारती स्कूल के अनियंत्रित छात्रों की स्मृति में यहां जो स्मारक थाना के पास बनवाया जा रहा है। उसके निर्माण कार्य पर स्थानीय प्रशासन के द्वारा पिछले कुछ सालों से रोक लगा दी गई है। जिस स्थान पर यह स्मारक बनवाया जा रहा है यह जमीन सरकार की है। बड़हिया के शहीद छात्रों की स्मृति में बनने वाले इस स्मारक को निर्माण पर यहां रोक लगने के बाद यथावत् छोड़ दिया गया है लेकिन स्मारक का बनना भी जरूरी है इसलिए यह बेहतर होगा कि बड़हिया में पुलिस फायरिंग में शहीद छात्रों का स्मारक शहर में किसी अन्य दूसरे स्थल पर बनवाया जाए। ज्ञान भारती स्कूल बड़हिया के लोगों की दान में धर्मार्थ जमीन पर ही स्थापित विद्यालय है। इस नाते बड़हिया वासी वहां अपने अकालमृत्यु से ग्रस्त कुल सपूतों का स्मारक लखीसराय के जिला शिक्षा विभाग को सूचना दे कर और अनुमति प्राप्त करके बना सकते हैं।
जगदंबा मंदिर परिसर में स्थापित श्रीधर सेवाश्रम के संचालकों के अलावा स्थानीय कांग्रेस आफिस के परिसर में भी इस स्मारक को बनाया जा सकता है। तिलक मैदान में भी बड़हिया वासी इस स्मारक को बना सकते हैं।
इसके अलावा गंगा तट पर भी बड़हिया वासियों की जमीन है। वहां पर भी शहीद छात्रों का स्मारक बनाया जा सकता है। लेकिन स्मारक जहां भी बने संबंधित स्वत्वाधिकरियों से अनुमति के बाद ही ऐसे निर्माण कार्य किए जाएं तभी शहीद छात्रों की आत्मा सम्मान का अनुभव करेगी। वर्तमान स्मारक जहां बन रहा है उस जगह पर भी अधूरे निर्माण कार्य को पूरा करने के लिए
लखीसराय के एसडीएम, डीएम और मुंगेर के आयुक्त से
बड़हिया के लोग प्रतिनिधि मंडल के रूप में उनसे मिलकर उनसे अनुमति की याचना कर सकते हैं लेकिन स्मारक के पास घटना की जानकारी से संबंधित पट पर पुलिस की क्रूरता निर्ममता से संबंधित बातों की निरर्थक चर्चा से कोई लाभ नहीं है क्योंकि हमारे समाज में कई बार इस तरह की दुखद घटनाएं घटित होती हैं। पुलिस कर्मी भी समाज में कई बार जनाक्रोश के शिकार हो जाते हैं। समाज में लोग खास तौर पर अपराध में अपने क्षुद्र स्वार्थों में संलग्न लोग अज्ञानतावश उनकी हत्या कर देते हैं । शहीद कोई भी हो उनको भुलाया नहीं जा सकता है।
बड़हिया में अपराध से वीरतापूर्ण संघर्ष करते हुए स्थानीय नगर थाना के इंस्पेक्टर भी इसी समय के आसपास शहीद हो गए थे। उनका परिवार इंदुपुर में ही बाल्मीकि सिंह के एन एच 80 पर स्थित किराए के मकान में रहता था। उनके बच्चे हमलोगों के साथ इंदुपुर के गांधी मध्य विद्यालय में पढ़ते थे। वह दलित समुदाय के कर्तव्यनिष्ठ लोकसेवक थे। बड़हिया वासियों को शहीद छात्रों के स्मारक के पास उनकी स्मृति में भी कुछ निर्माण कार्य करवाना चाहिए। इंदुपुर के नौरंगी शर्मा जिस गैराज में अपनी लकड़ी की दुकान चलाते थे, यह गैराज उसी मकान के बाहर था और यहां उस समय बड़हिया थाना की जीप दिवंगत इंस्पेक्टर रखा करते थे और की बार उनको कुछ सिपाहियों के साथ इंदुपुर में सड़क किनारे बैठकर ताश जुआ खेलते और गांजा पीते लोगों की धरपकड़ करते मैंने देखा था। तब मैं तीसरी चौथी कक्षा में पढ़ता था।

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