शिवगंगा साहित्य सेवा सीमित के तत्वावधान में मासिक काव्य गोष्ठी में कवियों ने बांधा समां

 

बलवान सिंह ब्यूरो चीफ बाराबंकी*

मसौली : शिवगंगा साहित्य सेवा समिति के तत्वावधान में जुलाई माह की मासिक काव्य गोष्ठी का आयोजन शिव गंगा मैरिज लॉन मसौली में किया गया। गोष्ठी की अध्यक्षता पंडित शिव दुलारे द्विवेदी ने की। शिव गंगा साहित्य सेवा समिति के पदाधिकारियों द्वारा गणमान्य अतिथियों व कवियों का स्वागत किया गया कवि डाक्टर कुमार पुष्पेन्द्र के द्वारा सरस्वती वंदना करते हुए काव्यांजलि का शुभारंभ किया गया।गोष्ठी में राष्ट्रीय कवि ओज विधा के वरेण्य हस्ताक्षर शिवकुमार व्यास व पंडित राम किशोर तिवारी ” किशोर” की गरिमामयी उपस्थिति में दो दर्जन से अधिक कवियों ने काव्य पाठ किया। शिव कुमार व्यास ने पढ़ा – हर युग का है अंत यही, रावण को मिटना पड़ता है।उस युग के तुलसी को तब रामायण लिखना पड़ता है। पंडित राम किशोर तिवारी ने- सावन कै छवि न्यारी, परत फुहारी रे हारी, कजरी पढ़कर तालियां बटोरी। गोष्ठी के मुख्य अतिथि प्रयागराज से उपस्थित अटल नारायण ने – माथ पर चारु चंद्र भस्म अंग नीलकंठ, कंठ में भुजंग धार योग में विलीन हैं, पढ़कर शिव स्तुति की कवि नागेंद्र सिंह ने पढ़ा ” दुनिया मा विज्ञान बहुत आगे है पर, बाबा आजौ अंतर्यामी का करिहौ। साहब नारायण शर्मा ने पढ़ा – मेरे सिर पर सदा हाथ मां बाप का, गुरु के चरणों में हूं मैं अभागा नहीं। कुमार पुष्पेन्द्र ने पढा़ – मांगा एक कोना था कृपा का मात्र आपसे तो, चाबी तीनों लोक की थमाई प्रभु आपने। ध्यान सिंह चिंतन द्वारा ” है दिन पर दिन जमाना रोजु बदलति जात बड़कन्नू, न मानति हैं बड़े बूढ़ेन की लरिका बात बड़कन्नू, पंक्तियां पढ़ी गईं। गोष्ठी का शानदार संचालन रवि रुद्रांश ने किया। इस बार पंडित शिव दुलारे द्विवेदी को उनके साहित्यिक योगदान के लिए अंगवस्त्र व स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। काव्यांजलि के क्रम में वरिष्ठ कवि अशोक कुमार सोनी, वीरेंद्र सिंह करुण, आई पी सिंह , कृपा शंकर सोनी, राम किशुन यादव, डा घनश्याम सलबैले , डीएन डायनामाइट, सोहन आजाद, शिवेंद्र सिंह अनूप एकलव्य सहित दर्जन कवियों ने कविता पाठ किया। इस अवसर पर अशोक कुमार द्विवेदी,रमेश चंद्र रावत, आदि गणमान्य जनों उपस्थित रहे। आभार ज्ञापित करते हुए समिति के संरक्षक अशोक सोनी ने कहा – कवि राजकुमार सोनी द्वारा लगाई गयी साहित्यिक वाटिका निरंतर फलीभूत हो रही है।

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