अमरावती की लेखिका भावना मोहन विधानी से राजीव कुमार झा की बातचीत
साहित्य:साक्षात्कार
प्रश्न: साहित्य की ओर कब और कैसे उन्मुख हुईं?
उत्तर: यह उन दिनों की बात है जब मैं कक्षा सातवीं में थी और मैंने एक हिंदी की कविता को अपने तरीके से लिखकर कक्षा में सुनाया था जिसे सुनकर मेरी हिंदी की टीचर ने मुझसे कहा था कि मैं बहुत अच्छी कविताएं लिख सकती हूं और मुझे प्रयास करना चाहिए। बस उन्हीं के प्रोत्साहन से मैंने बाल कविताओं को लिखना शुरू किया जो की गोंदिया के लोकल पेपर में प्रकाशित होती थी और बस यही से मेरा साहित्य से आत्मिक लगाव हो गया। जो आज तक कायम है।
प्रश्न:अपनी शिक्षा के बारे में जानकारी दीजिए।
उत्तर: मैं महाराष्ट्र की गोंदिया जिले से हूं । मेरे परिवार में मेरे माता-पिता और चार भाई और एक बहन है। मैंने बीए और डीए किया है और कुछ सालों तक सहायक शिक्षिका के रूप में कार्य किया है।
प्रश्न: वर्तमान में आप कहां रहती हैं?
उत्तर: वर्तमान में मैं अमरावती शहर में रहती हूं जहां पर महाराष्ट्रीयन संस्कृति का ज्यादा प्रभाव है।
प्रश्न – आपने किन – किन विधाओं में लेखन किया है?
उत्तर: मैंने साहित्य की अलग-अलग विधाओं में लेखन किया है जैसे लघु कथा, यात्रा वृतांत, कहानी, कविता, मुक्तक, लेख, शायरी। मेरे प्रिय लेखक मुंशी प्रेमचंद, महादेवी वर्मा हैं।
प्रश्न – बाल्यावस्था की कुछ स्मृतियों को साझा करें।
उत्तर – बचपन से मुझे सोशल वर्क का बहुत शौक था जब मैं छोटी थी तब भी छोटे-छोटे सामाजिक कार्यों में अपनी उपस्थिति दर्ज करवाती थी और वर्तमान में अमरावती की कई संस्थानों से जुड़ी हुई है जिसके अंतर्गत हम वृक्षारोपण, वृद्धाश्रम में भेंट देना, बच्चों और बड़ों के समस्याओं के अनुरूप सेमिनार को आयोजित करवाना, सामाजिक कार्य करवाना संस्कृति से संबंधित कार्यक्रम लेना, जानवरों की सेवा, स्वच्छता अभियान और धार्मिक कार्यक्रम करते हैं।
प्रश्न: अपने देश भारत मे आपने किस – किस प्रांत की यात्रा की है?
उत्तर: मैं भारत देश के गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र, गोवा मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश के कई स्थानों की यात्रा कर चुकी हूं।
प्रश्न: लेखक का क्या धर्म होता है?
उत्तर: मेरे अनुसार लेखक का धर्म होता है कि वह अपने लेखनी से समाज को जागरूक करें, समाज में जो बुराइयां व्याप्त है उन पर प्रकाश डाले। और समाज और देश में जो भी गलत हो रहा है उसके खिलाफ आवाज उठाएं। गलत और कुरितियो का विरोध करें।
प्रश्न: अपनी प्रकाशित पुस्तकों के बारे में बताएं?
उत्तर: मेरी अब तक चार एकल पुस्तिकाएं प्रकाशित हो चुकी है।
कुछ ख्वाहिशें अधूरी सी, रूह की पुकार, यादों की कब्रगाह,, हौसलों की उड़ान मेरी इन चारों पुस्तकों में कविताएं प्रकाशित हैं जो की मोटिवेशनल समाज, धर्म देश, संस्कृति ,महिला सशक्तिकरण, मजदूर ब,च्चों के अधिकारों, सामाजिक कुरीतियों और देश प्रेम से संबंधित है।




