बिहार कांग्रेस को कांग्रेसी मुक्त करने का प्रयास, समर्पित कांग्रेसियों को कारण बताओ नोटिस
“समर्पित कांग्रेस नेताओं का कांग्रेस मुख्यालय में धरना अब 22 नवंबर की जगह 21 नवंबर को”- आनन्द माधव
अजित प्रसाद / पटना: 43 कट्टर कांग्रेसियों को कारण बताओ नोटिस देकर वर्तमान बिहार कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम एवं प्रभारी कृष्णा अल्लावरू ने यह साबित कर दिया कि वे कितना भीरू हैं, घबड़ाये हुए हैं और अपना दामन बचानें के लिये लोगों पर उँगलियाँ उठा रहे हैं । इन लोगों ने यह तय कर लिया है कैसे बिहार कांग्रेस को कांग्रेसी मुक्त कर दिया जाय और आरएसएस के लोगों को भर दिया जाय। पहले टिकट बेचा, आरएसएस के लोगों दिया अब सदाक़त आश्रम इससे भरेंगे ।
राहुल जी ने कहा है “डरो मत”, तो हम डरेंगे नहीं, राहुल जी के हाथों को मज़बूत करने के लिये कांग्रेस को बचानें के लिये हमलोग किसी भी हद तक जायेंगे।
सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि अब धरना सदाक़त आश्रम में 22 तारीख़ की जगह 21 नवंबर को होगा । यह धरना इनलोगों के विरोध में है जिन लोगों ने कांग्रेस को बेचा है।हमलोग बिहार प्रभारी कृष्णा अल्लावरू , प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम, तीनों सह प्रभारी शाहनवाज आलम, देवेंद्र यादव एवं सुशील पासी को तुरंत बर्खास्त करनें की मॉंग आलाकमान से करते है।
आज़ विधायक छत्रपति यादव जी के यहाँ आयोजित एक आवश्यक बैठक में निम्नांकित कांग्रेसियों ने भाग लिया-
अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सदस्य, आनन्द माधव, पूर्व विधायक छत्रपति यादव, बँटी चौधरी, नागेंद्र पासवान विकल, राजकुमार राजन, कैसर खान, अजय प्रताप सिंह, उर्मिला सिन्हा नीलू, रेखा पटेल, सूरज सिन्हा, प्रद्युम्न यादव, शिवनीति पटेल, वसी अख़्तर, ई प्रेम कुमार, अध्यक्ष सरपंच संघ, वैशाली, ई रवी कुमार, आदि उपस्थित रहे।
आनन्द माधव ने प्रदेश अध्यक्ष से पूछा कि जब राष्ट्रीय अध्यक्ष, श्री मल्लिकार्जुन खड्गे, महासचिव संगठन श्री के सी वेणुगोपाल, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलौत एवं महासचिव अविनाश पांडेय जी हमलोगों के प्रतिनिधिमंडल से मिले और उन्होंने आश्वासन दिया कि चुनाव के बाद राहुल जी से हमलोगों की मुलाक़ात करवायेंगे तो यह नोटिस उनका भी अपमान है। श्री माधव ने यह भी कहा कि जब अनुशासन समिति पहले से ही था तो हड़बड़ी में दुबारा अनुशासन समिति बना कर नोटिस दिलवाने का क्या औचित्य है? यह बताता है कि ये लोग अपनें कुकृत्य पर पर्दा डालना चाहते हैं और बिचौलियों के साथ साठगांठ जारी है। लेकिन यह हमलोग होने नहीं देंगे।



