अणिमा श्रीवास्तव केंद्रीय विद्यालय, आरा में संगीत शिक्षिका हैं। इन्होंने संगीत विषय पर शोध भी किया है। इनके लिखे अधिकांश आलेख संगीत विषय पर चिंतन का परिणाम हैं। संगीत और साहित्य से इनका बचपन से ही बहुत लगाव रहा है। यहां प्रस्तुत है राजीव कुमार झा के साथ इनकी संक्षिप्त बातचीत…
साहित्य संसार: साक्षात्कार
प्रश्न: आपका एकल काव्य संग्रह कब तक प्रकाशित होगा?
उत्तर : मेरा एकल काव्य संग्रह जल्दी ही प्रकाशित होगा। ईश्वर की कृपा और आप सभी की शुभेच्छा रही तो शीघ्र ही प्रकाशित होगी। इस काव्य संग्रह में मेरी वर्षों की लिखी कविताएं पढ़ने को मिलेंगी । सामाजिक,भावनात्मक आदि संघर्षों की कथा और व्यथा, जिसे मैंने बहुत चुन – चुन कर शब्दों के धागों में पिरोने का प्रयास किया है। मुझे आशा है कि जब यह प्रकाशित होगी आप सभी के स्नेह आशीष से काव्य लेखन में मेरा मार्ग प्रशस्त होगा।
प्रश्न: अपनी पुस्तक इक्कीसवीं सदी के बारे में जानकारी दीजिए।
उत्तर : इक्कीसवीं सदी एक सांगीत से जुड़े विषयों पर लिखे आलेखों का संग्रह है। यह संगीत को विविध परिप्रेक्ष्य में समझने का एक प्रयास है। इसे मैंने आलेख का रूप देने का प्रयत्न किया है और संगीत विषय पर शोध के क्रम में इन आलेखों की लिखा है। यह आलेख संग्रह भी शीघ्र प्रकाशित होगा।
प्रश्न: अपनी कविताओं में विशेष रूप से प्रवाहित होने वाले भावों के बारे में बताएं?
उत्तर : मेरी कविताओं में मिले जुले विविध भाव अभिव्यक्त हैं। किन्तु जब मूल भाव की बात आती है तो मुझे सुप्रसिद्ध छायावादी कवि सुमित्रानंदन पंत जी की मार्मिक पंक्तियां “वियोगी होगा पहला कवि ,आह से निकला होगा गान” याद आतीं है। मूलतः मेरी कविताओं में आपको पीड़ा के भावों की अनुभूति अधिक होगी ।वो पीड़ा फिर चाहे, रोटी की हो। भूख की हो। समाज में स्त्रियों के असहाय जीवन की हो । पर्यावरण के क्षरण की हो या सामाजिक विद्रूपताओं से संबंधित हो। लेकिन इस पीड़ा में भी आनंद सृजन करने की प्रवृत्ति मिलेगी। आजकल जिस तरह की घटनाएं क्रम से घटती जा रही हैं,वो मनुष्यता के लिए कई यक्षप्रश्न खड़े करता है। इस से एक कवि हृदय कब तक अछूता रह सकता है? जब – जब इन घटनाओं , दुर्घटनाओं से हृदय आहत होता है एक कविता फूट पड़ती है।
प्रश्न: अपने घर परिवार के बारे में बताइए?
उत्तर: मैं दरअसल पटना के पास खगौल की निवासी हूं। यहां किराए के मकान में रहती हूं। मेरे पति का अपना व्यासाय है। बच्चों की पढ़ाई लिखाई पटना में हो रही है। मै केंद्रीय विद्यालय, आरा में संगीत शिक्षिका के पद पर कार्यरत हूं। प्रतिदिन खगौल के पास स्थित रेलवे स्टेशन से आरा आना- जाना करती हूं। बचपन से ही साहित्य से विशेष लगाव था। प्रेमचन्द जी, सुमित्रानंदन पंत, हरिवंशराय बच्चन, रामधारी सिंह दिनकर जी को पढ़ना बहुत पसंद था।



