गोरखपुर की कवयित्री प्रतिमा यादव से राजीव कुमार झा की बातचीत…

साहित्य: साक्षात्कार

 

प्रश्न – आपकी अभिरुचि बाल कविता लेखन में खासकर है। बाल कविता लेखन से आपको इतना लगाव क्यों है?

उत्तर – जी, मैं बाल कविताएं लिखती हूं। मैं कस्तूरबा विद्यालय की फुल टाइम टीचर हूं और मैं बच्चियों के बीच में रहती हूं तथा बाल मनोभाव को अच्छी तरह समझती हूं। मैं उनके रुचि के अनुसार लेखन कार्य करती हूं। उनके साथ शैक्षिक गतिविधियों का भी आयोजन करती हूं।

प्रश्न – गोरखपुर शहर के बारे में बताइए,?

उत्तर – जी मैं गोरखपुर की निवासी हूं। बाबा गोरखनाथ जो कि नाथ संप्रदाय के प्रवर्तक हैं उनकी तपोभूमि रहीं हैं। और इस शहर का नाम भी गोरखपुर उन्हीं के नाम पर पड़ा है। गोरखनाथ मंदिर इस शहर का प्रमुख दर्शनीय स्थल हैं। यहां की प्रमुख क्षेत्रीय बोली भोजपुरी हैं। जनवरी में यहां भव्य खिचड़ी का मेला लगता है। दूर दूर से लोग खिचड़ी का मेला देखने के लिए आते हैं और बाबा गोरखनाथ उनकी मनोकामना पूरी करते हैं।

प्रश्न – अपने बचपन की किसी यादगार घटना का वर्णन करें।

उत्तर – हां, मुझे याद है जब मैं बचपन में अपने दादी बाबा के साथ रहती थी । मेरे दादाजी बस्ती जिले के साथा ब्लॉक में
A.D.O ST के पोस्ट पर थे। उस समय गर्मी के दिन थे और पट्टे वाले चारपाई पर हम लोग सोते थे। रात में कुछ दिनों से चारपाई के अंदर हरकत होती थी तो दादी समझी कि चूहा अंदर घुसा होगा। रोज वह चारपाई को खड़ा करके झाड़ने का प्रयास करती थी। एक दिन आंगन में जब उन्होंने चारपाई खड़ी की तो उन्होंने देखा पट्टे के अंदर झांक कर तो विषैले नागराज अंदर थे। फिर हम सभी के होश उड़ गए। संजोग था हम लोग मौत के ऊपर सोते थे रोज यदि वह कहीं मौका पाकर काट लेता तो दादी और हम कबका स्वर्ग सिधार गए होते। आज भी इस घटना की स्मृति से मेरे रोंगटे खड़े हो जाते हैं।

प्रश्न – आप शिक्षिका होने के नाते देश की बालिकाओं , कन्याओं और छात्राओं की भावी भूमिका के बारे में क्या सोचती हैं?

उत्तर – जी हां मैं एक शिक्षिका के पद पर कार्यरत हूं। और हमारे यहां आवासीय विद्यालय में छात्राएं प्रवेश लेती हैं और पढ़ाई करके आगे बढ़ती हैं। शिक्षा की रोशनी दिखाने के साथ-साथ मैं एक साहित्यकार भी हूं। मैं सबसे अधिक क्या मानती हूं कि बेटियों में संस्कार और उच्च आदर्शों की उनके अंदर स्थापना करनी चाहिए जिससे महान विभूतियों की कहानी मै उन्हें सुनाती रहती हूं।

प्रश्न – पिछले दिनों राजस्थान में किसी बालिका के यौन उत्पीड़न की घटना ने सारे देश को झकझोर कर रख दिया। इस बारे में आपकी क्या प्रतिक्रिया है?

उत्तर – आधुनिकता की इस अंधी दौड़ में जिस प्रकार से बेटियों के साथ घृणित और निंदनीय कार्य हो रहे हैं वास्तव में यह बहुत ही चिंताजनक है।
हमें अपने बेटियों के साथ-साथ बेटों के अंदर भी सही संस्कार और धार्मिकता की भावना को जागृत करना चाहिए। और यह सोचना चाहिए कि कैसे अपने बच्चों के अंदर सद्गुणों का विकास हो। दूसरी बात यह है हम अपनी बेटियों को विचारों से आधुनिक बनाएं पहनावे और रहन-सहन पर उन्हें उचित प्रबंध भी लगाएं। जो उनके हित में हो।

प्रश्न – अपने प्रिय कवियों और लेखकों के बारे में बताएं?

उत्तर – हमारे प्रिय कवि और लेखक सूरदास ,तुलसीदास और आधुनिक काल की महान कवयित्री महादेवी वर्मा का नाम प्रमुख रूप से शामिल है।

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