भरत तिवारी की निर्मम हत्या मामला
हत्यारे पुलिस प्रशासन पर कार्रवाई हो: चौबे
भारत पोस्ट संवाददाता
पटना। भोजपुर में भरत तिवारी की मौत का मामला गहराता जा रहा है। इस मामले में राजनीतिक बयानबाजी शुरू हो गई है। बिहार सरकार के नेता अपनी ही पुलिस पर सवाल खड़े कर रहे हैं। बीजेपी नेता अश्विनी चौबे ने पुलिस को हत्यारा बताया। साथ ही इस घटना को लोकतंत्र को शर्मसार करने वाली घटना बताया। फेसबुक पोस्ट के जरिए उन्होंने अपनी बात रखी।
अश्विनी चौबे ने अपने फेसबुक पोस्ट में लिखा, अत्यंत दुखद. लोकतंत्र को शर्मसार करने वाला लोमहर्षक घटना से व्यथित हूं। कल भोजपुर के बिलौटी, शाहपुर निवासी नवयुवक भरत भूषण तिवारी की पुलिस प्रशासन द्वारा आत्मसमर्पण के बाद उसकी गोली मारकर नृशंस हत्या कर दी गई जो हृदय विदारक है। लोकतंत्र में हिंसा की कोई जगह नहीं है। आगे उन्होंने यह भी लिखा, मैं देश के गृह मंत्री अमित शाह से आग्रह करता हूं कि भरत तिवारी की निर्मम हत्या पर संज्ञान लेते हुए हत्यारे बने पुलिस प्रशासन के खिलाफ तत्काल कार्रवाई कर उच्च स्तरीय जांच का आदेश दें। ताकि समाज में गलत संदेश ना जाए। साथ ही मैं बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से आग्रह करता हूं कि हत्यारों को तत्काल 48 घंटे के भीतर जेल भेजकर बिहार में सुशासन होने का परिचय दें।
अश्विनी चौबे ने लिखा, ष्युवाओं को अपराधीकरण से बचाना सरकार का परम कर्तव्य होना चाहिए। अगर भरत ने आत्मसमर्पण कर दिया था ;जो उसके वीडियो से स्पष्ट है, तो उसे खूंखार अपराधियों की तरह गोली मार देना न्याय का द्योतक सरासर नहीं है। उसे हिरासत में लेकर न्यायसंगत कार्रवाई करनी चाहिए थी। किसी मां से उसके बच्चे को इस प्रकार जानबूझ कर छीन लेना सरकार के न्याय व्यवस्था को कलंकित करता है। साथ ही यह पुलिस की कुत्सित घृणित और विद्वेषपूर्ण मानसिकता को भी दर्शाता है। जिससे सरकार की बदनामी हो रही है। भविष्य में इस प्रकार की घटना न घटे इसके लिए कड़ी कार्रवाई अपेक्षित है।
जानकारी के मुताबिकए एनकाउंटर के मामले में शाहपुर थानाध्यक्ष राजेश मालाकार के निलंबन के बाद दो सब.इंस्पेक्टर ;एसआई. और एक सिपाही को भी निलंबित कर दिया है। बताया गया है कि एनकाउंटर की घटना से एक दिन पहले 16 जून को बिलौटी गांव से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ था। वीडियो के सामने आने के बाद पुलिस की कार्यशैली और घटनाक्रम को लेकर कई तरह के सवाल उठे थे। उच्च अधिकारियों ने जांच में प्रथम दृष्टया संबंधित पुलिसकर्मियों की भूमिका संदिग्ध पाए जाने पर चारों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।


