भीषण गर्मी एवं बरसात में आँखो की देखभाल जरूरी

डॉ.समरेंद्र पाठक
वरिष्ठ पत्रकार

नई दिल्ली,2 जुलाई 2026 (एजेंसी)।दक्षिण एशिया खासकर भारत में भीषण गर्मी एवं बरसात से आंखों को बचाना बहुत जरूरी है,अन्यथा परेशानी में पड़ सकते हैं।इस वजह से प्रदूषण वाले इलाके, रेगिस्तान एवं आंधी तूफान आने वाले क्षेत्रों में सतर्कता बेहद जरूरी है।

नेत्र विशेषज्ञों का कहना है,कि इस स्थिति में आंखों को हर संभव बचायें।तेज धूप एवं प्रदूषण वाले इलाके में यथासंभव निकलने से बचें।जरूरी हो तो काले चश्मे का इस्तेमाल करें।बारिश के गंदे पानी या संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से बचें।अपनी आंखों को साफ और सूखा रखें।

इसी प्रकार इस मौसम में संक्रमित व्यक्ति के तौलिये या रुमाल का इस्तेमाल न करें।आंखों को बार-बार छूने या रगड़ने से बचें। कॉन्टेक्ट लेंस पहनने से बचें।इससे संक्रमण का खतरा बढ़ता है। दूसरों के काजल या आईलाइनर का इस्तेमाल न करें।

यह राय देश के जाने माने नेत्र रोग विशेषज्ञों न इंटरव्यू के दौरान दी है।उनका मानना है,कि गर्मी और मानसून के मौसम में नमी और धूल के कारण आंखों में कीटाणु तेजी से फैलते हैं।

केंद्र सरकार में स्वास्थ्य मंत्रालय में अपर महानिदेशक रहे नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ.के.पी.एस. मलिक कहते हैं,कि तेज गर्मी और धूप से आंखों की नमी जल्दी सूख जाती है। इससे आंख में सूखापन और किरकिरापन होता है।

डॉ.मलिक ने कहा कि गर्म हवा और उड़ने वाली धूल-मिट्टी से आंखों में खुजली और सूजन होती है।पसीने और धूल से पलक की ग्रंथियां बंद हो जाती हैं। इससे पलक पर लाल, दर्दनाक फुंसी बन जाती है।

दिल्ली एवं एनसीआर में कार्पोरेट जगत के आंखों के नामी अस्पतालों में सुमार “आई- 7” के प्रमुख डॉ.संजय चौधरी कहते हैं,कि भीषण गर्मी के बाद बरसात शुरू होते ही आंखों की समस्याएं आम बात है।इस वजह से लोग काफी असहज महसूस करते हैं।

डॉ.चौधरी ने कहा कि इस मौसम में आंख आना या पिंक आई और आंखों का सूखापन एक आम समस्या है। इनके कारण आंखों में लालिमा, जलन, खुजली, और पानी आने जैसी समस्याएं होती है।

सेंटर फॉर साइट के सीएमडी एवं पद्मश्री से सम्मानित डॉ.महिपाल सिंह सचदेवा कहते हैं,कि भीषण गर्मी की वजह से आंखों में सूखापन आता है और शाम तक लालिमा एवं चुलबुलाहट होने लगती है।

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में नेत्र रोग विशेषज्ञ रहे डॉ.सचदेवा ने कहा कि भीषण गर्मी एवं बरसात में आंखों में संक्रमण की समस्याएं भी होती है और कार्निया पर भी असर पड़ता है।एल.एस.

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