कूचबिहार (उत्तर बंगाल )के तीनबीघा सीमा पर कटीले तार लगाने को लेकर भारी तनाव, फ्लैग मीटिंग बेनतीजा;

* ग्रामीणों ने दी आंदोलन की चेतावनी

 

भारत पोस्ट न्यूज़ कूचबिहार: पश्चिम बंगाल के कूचबिहार जिले के तीनबीघा सीमांत अंतर्गत कुचलीबाड़ी इलाके में भारत-बांग्लादेश सीमा पर कटीले तार (फेंसिंग) लगाने के काम को लेकर एक बार फिर भारी तनाव व्याप्त हो गया है। आरोप है कि बॉर्डर गार्ड्स बांग्लादेश (BGB) की आपत्ति और सीमावर्ती इलाके के कुछ स्थानीय लोगों के विरोध के कारण जमीन की मापी (सर्वे) के काम को लेकर अशांति की स्थिति पैदा हो गई है।

जमीन की मापी को लेकर शुक्रवार से शुरू हुआ विवाद
प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस विवाद की शुरुआत शुक्रवार से हुई जब सीमा सुरक्षा बल (BSF) की निगरानी में जमीन की मापी का काम शुरू किया गया। इसके बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए बीएसएफ के उच्च अधिकारियों के साथ-साथ स्थानीय भाजपा विधायक और सांसदों को भी पूरी स्थिति से अवगत कराया गया। शनिवार को सीमावर्ती इलाके में तनाव कम करने के लिए बीएसएफ अधिकारियों की उपस्थिति में दो अलग-अलग फ्लैग मीटिंग (Flag Meetings) आयोजित की गईं— पहली बैठक बीजीबी के साथ हुई और दूसरी बैठक स्थानीय ग्रामीणों व भाजपा विधायक के साथ की गई।

जरूरत पड़ी तो फिर करेंगे खूनी आंदोलन’: भारतीय नागरिक
बैठक के दौरान सीमावर्ती इलाके के भारतीय नागरिकों के एक बड़े हिस्से ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट कर दिया कि तीनबीघा इलाके में कटीले तार के निर्माण कार्य में किसी भी तरह की बाधा या अड़ंगा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि काम रोका गया तो वे फिर से ‘खूनी आंदोलन’ के रास्ते पर चलने के लिए तैयार हैं। उनका साफ कहना था कि बांग्लादेशी पक्ष के दबाव के आगे न तो भारतीय सेना (BSF) झुकेगी और न ही भारत के नागरिक सिर झुकाएंगे।

घुसपैठ और तस्करी रोकने के लिए कटीले तार जरूरी
स्थानीय लोगों और सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि इस सीमावर्ती इलाके में लंबे समय से कटीले तार न होने के कारण:

गोवंश तस्करी (काउ स्मगलिंग)
अवैध घुसपैठ (इन्फिल्ट्रेशन)

जैसी देशविरोधी गतिविधियां लगातार बढ़ रही थीं, जिससे देश की आंतरिक सुरक्षा को लेकर चिंताएं गहरी हो रही थीं। घुसपैठियों की बेरोक-टोक आवाजाही ने स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा बलों के सिरमौर में दर्द कर रखा था।

सत्ता परिवर्तन के बाद तेजी से लिया गया फैसला
इस बीच, राज्य में हुए राजनीतिक उलटफेर और नई सरकार के गठन के बाद सीमा सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए सीमा से सटी इस विवादित जमीन को जल्द से जल्द बीएसएफ को सौंपने का निर्णय लिया गया। सरकार के इसी फैसले के तहत जमीन हस्तांतरण (लैंड ट्रांसफर) के बाद अब प्रशासनिक स्तर पर मापी का काम शुरू हुआ है। प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि मापी पूरी होते ही बहुत जल्द कटीले तार लगाने का काम युद्धस्तर पर शुरू कर दिया जाएगा। हालांकि, सरकार की इस त्वरित पहल के बाद से कुचलीबाड़ी सीमांत इलाके में सुरक्षा चाक-चौबंद कर दी गई है और बीएसएफ पूरी स्थिति पर कड़ी नजर रख रही है।

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