रंगीलो महोत्सव में आयोजित ‘दुग्ध प्रतियोगिता’ मे एचएफ गाय ने बनाया 65 किलो का ऐतिहासिक रिकॉर्ड

 

राजस्थान। राष्ट्रीय डेरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) एवं इसकी पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक संस्था एनडीडीबी डेयरी सर्विसेज़ (एन डी एस) द्वारा 27-28 फरवरी को श्री कर्ण नरेंद्र कृषि विश्ववि‌द्यालय, जोबनेर (राजस्थान) में आयोजित दो दिवसीय ‘रंगीलो’ डेयरी एवं पशुपालन महोत्सव ने देश के डेयरी क्षेत्र में नई ऊर्जा और दिशा प्रदान की। वैज्ञानिकता, नवाचार और परंपरा के संगम के रूप में स्थापित ‘रंगीलो’ ने डेयरी क्षेत्र के समग्र विकास का सशक्त मंच प्रस्तुत किया।

इसी महोत्सव के अंतर्गत आयोजित ‘दुग्ध प्रतियोगिता’ ने विशेष आकर्षण प्राप्त किया। प्रतियोगिता में हरियाणा के हिसार निवासी पशुपालक पवन कुमार की एचएफ (होल्स्टीन फ्रिज़ियन) नस्ल की गाय ने 24 घंटे में 64.44 किलो (करीब 65 किलो) दुग्ध उत्पादन किया। यह उपलब्धि ‘रंगीलो’ मंच पर दर्ज एक ऐतिहासिक रिकॉर्ड के रूप में सामने आई।

राजस्थान के अजमेर के पशुपालक मुकेश कुमार चौधरी की गिर नस्ल की गाय ने 26.78 किलो (करीब 27 किलो) दुग्ध उत्पादन कर अपनी श्रेणी में नया मानक स्थापित किया। अन्य नस्लों में भी उल्लेखनीय प्रदर्शन दर्ज हुआ- साहीवाल ने 23 किलो, थारपारकर ने 14 किलो, राठी ने 18 किलो, जर्सी ने 37 किलो तथा मूर्रा भैंस ने 23 किलो का सर्वाधिक उत्पादन किया।

इस अवसर पर एनडीडीबी अध्यक्ष डॉ मीनेश शाह ने कहा, “रंगीलो’ केवल एक प्रतियोगिता या प्रदर्शनी नहीं है, बल्कि यह वैज्ञानिक डेयरी प्रबंधन को जमीनी स्तर तक पहुंचाने का एक सशक्त प्रयास है। जब दुग्ध उत्पादन की रिकॉर्डिंग पारदर्शी और वैज्ञानिक पद्धति से होती है, तो किसानों का विश्वास बढ़ता है और उन्हें अपने पशुधन क्षमता का वास्तविक आकलन मिलता है। हमारा उद्देश्य है कि देशी एवं उन्नत दोनों नस्लों की उत्पादकता में सुधार लाकर किसानों की आय में स्थायी वृ‌द्धि सुनिश्चित की जाए।”

‘रंगीलो’ की एक प्रमुख विशेषता यह रही कि दुग्ध उत्पादन की रिकॉर्डिंग वैज्ञानिक पद्धति से तीन चरणों में की गई, जिससे पारदर्शिता और विश्वसनीयता सुनिश्चित हुई। यह प्रक्रिया पशुपालकों को अपनी पशु संपदा की वास्तविक उत्पादक क्षमता समझने और बेहतर प्रबंधन निर्णय लेने में सहायक सिद्ध हुई। महोत्सव में अत्याधुनिक डेयरी तकनीकों का प्रदर्शन, प्रगतिशील किसानों के अनुभव साझा सत्र, तकनीकी एवं नीति संवाद तथा राजस्थान की लोक संस्कृति पर आधारित सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी आयोजित की गईं। इस प्रकार ‘रंगीलो’ नवाचार और परंपरा का संगम बनकर उभरा।

डेयरी विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे आयोजन किसानों को श्रेष्ठ प्रथाएं अपनाने, उन्नत नस्ल प्रबंधन को बढ़ावा देने और आधुनिक डेयरी सेवाओं से जुड़ने के लिए प्रेरित करते हैं। ‘रंगीलो’ महोत्सव ने राजस्थान के सशक्त डेयरी इकोसिस्टम को राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत करते हुए किसानों, विशेषज्ञों, सहकारी संस्थाओं और उ‌द्योग प्रतिनिधियों को एक साझा मंच पर जोड़ा। यह आयोजन देशी एवं उन्नत नस्लों की उत्पादक क्षमता और वैज्ञानिक पशुपालन पद्धतियों की प्रभावशीलता का प्रेरक उदाहरण बनकर उभरा।

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